रुद्रप्रयाग। केदारनाथ यात्रा मार्ग पर सोमवार तड़के एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। रुद्रप्रयाग जिले के फाटा क्षेत्र में महाराष्ट्र के पुणे से आए 22 श्रद्धालुओं को लेकर जा रही एक बस अचानक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बने पैराफिट को तोड़ते हुए गहरी खाई की ओर लटक गई।
बस के खाई में गिरने से पहले पैराफिट के पत्थरों में अटक जाने से सभी यात्रियों की जान बच गई। इस घटना के बाद यात्रियों और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली।
तीखे मोड़ पर अनियंत्रित हुई बस
जानकारी के अनुसार, बस सोमवार सुबह करीब 4 बजे जामू क्षेत्र स्थित एक होटल से केदारनाथ यात्रा के लिए रवाना हुई थी। जामू हेलीपैड के समीप ढलान वाले मार्ग पर एक तीखे मोड़ के दौरान चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा। देखते ही देखते बस सड़क किनारे बने सुरक्षा पैराफिट को तोड़ते हुए खाई की तरफ झुक गई और किनारे पर लटक गई।
खाई की ओर झुकते ही मच गई चीख-पुकार
बस के खाई की तरफ झुकते ही अंदर बैठे श्रद्धालुओं में अफरा-तफरी मच गई। अंधेरे और भयावह स्थिति के बीच यात्रियों की सांसें थम गईं।
हालांकि चालक ने घबराहट में भी संयम नहीं खोया और साहस का परिचय देते हुए सभी यात्रियों को एक-एक कर सुरक्षित बस से बाहर निकाला। कुछ ही मिनटों में सभी 22 श्रद्धालु सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिए गए।
100 मीटर गहरी खाई में गिर सकती थी बस
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बस जिस स्थान पर फंसी थी, उसके नीचे करीब 100 मीटर गहरी खाई है। यदि वाहन पैराफिट के टूटे हुए हिस्सों में नहीं अटकता तो यह हादसा बेहद भयावह हो सकता था। स्थानीय लोगों ने इसे किसी चमत्कार से कम नहीं बताया।
मौके पर पहुंची पुलिस, जांच शुरू
घटना की सूचना मिलते ही फाटा चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की। पुलिस ने बस को सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। स्थानीय लोगों ने भी राहत कार्य में सहयोग किया।
पुलिस ने बताया कि दुर्घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है और सभी यात्री पूरी तरह सुरक्षित हैं। घटना के कारणों की जांच की जा रही है।
ड्राइवर बना 22 जिंदगियों का रक्षक
केदारनाथ यात्रा मार्ग पर हुए इस हादसे ने एक बार फिर पहाड़ी सड़कों पर सतर्क ड्राइविंग की अहमियत को उजागर किया है। वहीं चालक की त्वरित सूझबूझ और साहसिक निर्णय ने संभावित त्रासदी को टालते हुए 22 श्रद्धालुओं की जान बचा ली। यात्रियों और स्थानीय लोगों ने चालक की जमकर सराहना की।





