करोड़ों की योजना कागज़ों में कैद: सरकार ने बदली पॉलीहाउस बनाने वाली कंपनी

देहरादून: उत्तराखंड में बेमौसमी सब्जियों और फूलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई महत्वाकांक्षी पॉलीहाउस योजना अब तक धरातल पर नहीं उतर पाई है। वर्ष 2023 में शुरू की गई इस योजना के तहत हजारों पॉलीहाउस स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन 2026 तक भी काम अपेक्षित गति नहीं […]

देहरादून: उत्तराखंड में बेमौसमी सब्जियों और फूलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई महत्वाकांक्षी पॉलीहाउस योजना अब तक धरातल पर नहीं उतर पाई है। वर्ष 2023 में शुरू की गई इस योजना के तहत हजारों पॉलीहाउस स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन 2026 तक भी काम अपेक्षित गति नहीं पकड़ सका है।

 

प्रदेश में इस योजना के लिए 150 करोड़ रुपये से अधिक की लागत का प्रावधान किया गया था। बावजूद इसके, वर्षों बीत जाने के बाद भी योजना की प्रगति बेहद धीमी बनी हुई है। हालात यह हैं कि हजारों पॉलीहाउस स्थापित करने के लक्ष्य के मुकाबले विभाग अभी काफी पीछे चल रहा है।

 

दरअसल, वर्ष 2023 में सरकार ने राज्य में लगभग 22 हजार पॉलीहाउस लगाने की योजना पर काम शुरू किया था। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर जरूरी कागजी प्रक्रिया भी उसी वर्ष शुरू कर दी गई थी। इसके बाद 6 मार्च 2024 को इस परियोजना के क्रियान्वयन के लिए एक कार्यदायी संस्था भी तय कर दी गई थी। हालांकि, दो साल बीत जाने के बाद भी परियोजना अपेक्षित रूप से आगे नहीं बढ़ पाई।

 

यह योजना नाबार्ड की आरआईडीएफ (Rural Infrastructure Development Fund) के तहत क्लस्टर आधारित छोटे पॉलीहाउस स्थापित करने के उद्देश्य से बनाई गई थी। इसके लिए कुल 551.05 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई थी। लेकिन लक्ष्य के अनुरूप काम आगे नहीं बढ़ सका और विभाग अब तक 22 हजार पॉलीहाउस स्थापित करने के लक्ष्य से काफी दूर है।

 

काम की धीमी गति को देखते हुए सरकार ने पहले से नियुक्त कार्यदायी संस्था की जिम्मेदारी वापस लेने का निर्णय लिया है। पहले यह काम ब्रेथवेट एंड कंपनी लिमिटेड को सौंपा गया था, लेकिन कार्य में अपेक्षित तेजी नहीं आने के कारण इसे हटाने का फैसला लिया गया है।

 

अब विभाग ने नई व्यवस्था लागू करते हुए एमपैनल्ड वेंडरों के माध्यम से कार्य कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) के जरिए भुगतान की प्रक्रिया अपनाने की बात कही गई है।

 

इस संबंध में अपर सचिव आनंद श्रीवास्तव ने आदेश जारी करते हुए निर्देश दिए हैं कि एक महीने के भीतर संबंधित पीएसयू से कार्य वापस लेकर एमपैनल्ड वेंडरों के माध्यम से सीबीडीसी प्रणाली से काम शुरू कराने की सभी औपचारिकताएं पूरी की जाएं। सरकार को उम्मीद है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद योजना की गति तेज होगी और तय लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में काम आगे बढ़ सकेगा।

Also Read This

बड़ी खबर: जंतर-मंतर पर वर्दी पहनकर भाषण देना पड़ा भारी।  कॉन्स्टेबल शेर सिंह सेवा से बर्खास्त

देहरादून/पिथौरागढ़: दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस की वर्दी पहनकर मंच से भाषण देने वाले उत्तराखंड पुलिस के निलंबित कॉन्स्टेबल शेर...

हादसा: देहरादून-हरिद्वार हाईवे पर आग का गोला बनी चलती कार । ऐसे बची चालक की जान

देहरादून: देहरादून-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग पर बुधवार को एक बड़ा हादसा टल गया। हर्रावाला क्षेत्र में मणिमाई मंदिर से करीब 200 मीटर आगे चलती कार...

Related Posts