पुरोला, जून 2026।नीरज उत्तराखंडी
उत्तरकाशी जिले के पुरोला नगर क्षेत्र में स्थित मोरी रोड कूड़ा डंपिंग जोन एक बार फिर चर्चा में है। मानसून की दस्तक से पहले स्थानीय लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं। डंपिंग जोन के नीचे पहले से मौजूद दरारों और संभावित भू-क्षरण के खतरे को देखते हुए ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल तकनीकी एवं भू-वैज्ञानिक निरीक्षण कराने की मांग की है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि भारी बारिश के दौरान भूमि धंसाव या भूस्खलन की स्थिति बनती है, तो डंपिंग जोन में जमा कूड़ा सीधे नीचे बह रही कमल नदी में समा सकता है। इससे नदी का जल प्रदूषित होने के साथ-साथ क्षेत्र के पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
दो साल पुरानी आपदा की याद ने बढ़ाई चिंता
ग्रामीणों के अनुसार, लगभग दो वर्ष पूर्व आई आपदा के दौरान डंपिंग जोन के नीचे की जमीन में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई थीं। उस समय स्थिति को देखते हुए नगर पालिका प्रशासन ने सुरक्षा के लिए नीचे की ओर रिटेनिंग वॉल (सुरक्षा दीवार) का निर्माण कराया था।
हालांकि अब मानसून नजदीक आने के साथ ही लोग सुरक्षा दीवारों की मजबूती और डंपिंग जोन की वर्तमान स्थिति को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि केवल सुरक्षा दीवारें पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र का वैज्ञानिक परीक्षण कर संभावित जोखिम का आकलन किया जाना चाहिए।
ग्रामीणों ने की भू-वैज्ञानिक सर्वे की मांग
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि डंपिंग जोन का भू-वैज्ञानिक और तकनीकी सर्वेक्षण कराया जाए, ताकि बारिश के दौरान किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके। उनका कहना है कि पर्यावरण संरक्षण और नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए ठोस कदम उठाना जरूरी है।
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नगर पालिका बोली- स्थिति पर रखी जा रही नजर
इस संबंध में नगर पालिका पुरोला के अधिशासी अधिकारी (ईओ) प्रदीप दयाल ने बताया कि नगर क्षेत्र के लिए सुरक्षित और स्थायी कूड़ा निस्तारण स्थल की तलाश की जा रही है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान डंपिंग जोन पर सुरक्षा दीवारों का निर्माण पहले ही कराया जा चुका है और प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। बरसात के मौसम में किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए आवश्यक सतर्कता बरती जा रही है।
पर्यावरण और नदी संरक्षण बना बड़ा मुद्दा
विशेषज्ञों का मानना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित डंपिंग जोनों की नियमित निगरानी और वैज्ञानिक मूल्यांकन बेहद आवश्यक है। यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो कूड़ा निस्तारण स्थल न केवल पर्यावरण बल्कि जल स्रोतों के लिए भी गंभीर खतरा बन सकते हैं।
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