चमोली / गिरीश चंदौला
उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में आज भी कई गांव सड़क सुविधा से वंचित हैं। ऐसे में बीमारी या आपात स्थिति के दौरान मरीजों को अस्पताल पहुंचाने की जिम्मेदारी ग्रामीणों को खुद उठानी पड़ती है। चमोली जनपद के देवाल विकासखंड के दूरस्थ पिनाऊ गांव में एक बार फिर ऐसी ही तस्वीर सामने आई है, जहां ग्रामीणों ने बीमार बुजुर्ग को खुद के संसाधनों से बनाए गए स्टेचर पर कंधों में उठाकर कई किलोमीटर पैदल चलकर अस्पताल पहुंचाया।
दरअसल, पिनाऊ गांव निवासी पूर्व सैनिक केसर सिंह, उम्र करीब 65 वर्ष, की अचानक तबीयत बिगड़ गई। गांव तक सड़क सुविधा न होने के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी। जिसके बाद ग्रामीणों ने तत्काल लकड़ी और अन्य स्थानीय संसाधनों से स्टेचर तैयार किया और मरीज को करीब 10 से 12 किलोमीटर कठिन पहाड़ी रास्तों से पैदल सड़क तक पहुंचाया, जहां से उन्हें अस्पताल ले जाया गया।
इन तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह ग्रामीण जान जोखिम में डालकर मरीज को कंधों पर उठाकर दुर्गम रास्तों से गुजर रहे हैं। यह दृश्य सरकार के सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों की जमीनी हकीकत को भी उजागर करता है।
ग्राम प्रधान लखपत दानू ने बताया कि पिनाऊ गांव तत्कालीन विधायक स्वर्गीय शेर सिंह दानू का गांव है। उत्तर प्रदेश के समय से लेकर उत्तराखंड राज्य बनने के बाद तक आज भी गांव सड़क सुविधा से वंचित है। उन्होंने कहा कि धुरा-धारकोट-बांक पिनाऊ मोटर मार्ग की फाइल पिछले करीब 10 वर्षों से शासन स्तर पर लंबित है। ग्रामीण लगातार शासन-प्रशासन के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन सड़क निर्माण का कार्य आज तक शुरू नहीं हो पाया।
उन्होंने कहा कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि गांव तक पहुंचते हैं और बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद गांव की समस्याओं को भुला दिया जाता है। सड़क सुविधा न होने से ग्रामीणों को हर दिन कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। पिनाऊ गांव देवाल विकासखंड का सबसे दूरस्थ गांव माना जाता है, लेकिन आज तक यहां मूलभूत सुविधाएं नहीं पहुंच पाई हैं।
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