Home उत्तराखंड बदहाली: 26 वर्षों बाद भी निजी कमरे में चल रहा लिवाड़ी का सरकारी अस्पताल।मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित

बदहाली: 26 वर्षों बाद भी निजी कमरे में चल रहा लिवाड़ी का सरकारी अस्पताल।मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित

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बदहाली: 26 वर्षों बाद भी निजी कमरे में चल रहा लिवाड़ी का सरकारी अस्पताल।मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित

मोरी/उत्तरकाशी।31 मई 2026
रिपोर्ट -नीरज उत्तराखंडी
विकासखंड मोरी के दूरस्थ लिवाड़ी गांव में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। विडंबना यह है कि गांव का राजकीय एलोपैथिक अस्पताल आज भी किसी ग्रामीण के निजी आवास के एक कमरे में संचालित हो रहा है। उत्तराखंड राज्य गठन के 26 वर्ष बाद भी अस्पताल का अपना भवन न बन पाना स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

ग्रामीणों के अनुसार लिवाड़ी का राजकीय एलोपैथिक अस्पताल मोरी मुख्यालय के प्राथमिक अस्पताल के साथ ही स्थापित किया गया था। लेकिन जहां अन्य क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार हुआ, वहीं लिवाड़ी अस्पताल आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। अस्पताल भवन निर्माण की प्रक्रिया वर्षों पहले शुरू हुई थी, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता और विभागीय लापरवाही के कारण निर्माण कार्य अधूरा ही रह गया।

सबसे बड़ी समस्या अस्पताल में स्थायी एलोपैथिक चिकित्सक की तैनाती न होना है। ग्रामीणों का कहना है कि डॉक्टर के अभाव में मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता। मामूली बीमारियों से लेकर आपातकालीन स्थितियों तक में लोगों को कई किलोमीटर दूर मोरी या अन्य अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। इससे विशेषकर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार उच्च अधिकारियों, स्वास्थ्य विभाग और जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया है, लेकिन आज तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। आश्वासन तो बार-बार मिले, लेकिन धरातल पर कोई सुधार दिखाई नहीं दिया।

ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य सुविधा किसी भी क्षेत्र के विकास की आधारभूत आवश्यकता है, लेकिन लिवाड़ी गांव के लोग दशकों से उपेक्षा का दंश झेल रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं निकाला गया तो क्षेत्र की जनता व्यापक जनआंदोलन करने को बाध्य होगी।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें

राजकीय एलोपैथिक अस्पताल के लिए शीघ्र स्थायी भवन का निर्माण कराया जाए।
अस्पताल में स्थायी एलोपैथिक चिकित्सक एवं आवश्यक स्वास्थ्य कर्मियों की नियुक्ति की जाए।
अस्पताल में दवाइयों और चिकित्सा उपकरणों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
दूरस्थ क्षेत्र को देखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए विशेष योजना लागू की जाए।
ग्रामीणों ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि लिवाड़ी गांव की वर्षों पुरानी इस समस्या का तत्काल संज्ञान लेते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि क्षेत्रवासियों को बेहतर और सुगम स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। उनका कहना है कि स्वास्थ्य सेवा कोई सुविधा नहीं, बल्कि नागरिकों का मूल अधिकार है और लिवाड़ी के लोगों को भी इसका पूरा लाभ मिलना चाहिए।

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