देहरादून: उत्तराखंड के बहुचर्चित डीएवी छात्रवृत्ति घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए स्पेशल पीएमएलए कोर्ट में अभियोजन शिकायत दाखिल कर दी है। जांच एजेंसी के अनुसार वर्ष 2009 से 2014 के बीच अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों के लिए निर्धारित करीब 2.27 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति राशि को कथित रूप से धोखाधड़ी कर हड़प लिया गया था।
छात्रवृत्ति के नाम पर करोड़ों की हेराफेरी
ईडी के मुताबिक मामले की जांच पुलिस एफआईआर और उसके बाद दाखिल चार्जशीट के आधार पर शुरू की गई थी। जांच में सामने आया कि छात्रों के लिए निर्धारित छात्रवृत्ति राशि को एक अनधिकृत बैंक खाते के माध्यम से डायवर्ट कर गबन किया गया।
जांच में पाया गया कि वर्ष 2009 से 2014 के बीच इस खाते में छात्रवृत्ति और कॉलेज के अन्य खातों से धनराशि ट्रांसफर की गई, जिससे ब्याज सहित करीब 2.27 करोड़ रुपये जमा हुए।
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बैंक खाते के नाम पर हुई बड़ी धोखाधड़ी
ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि डीएवी (पीजी) कॉलेज प्रबंधन ने देना बैंक की लक्ष्मी रोड शाखा में खाता खोलने की अनुमति दी थी, लेकिन कथित तौर पर दस्तावेजों में हेरफेर कर जीएमएस रोड शाखा में एक अनधिकृत खाता संचालित किया गया।
जांच एजेंसी के अनुसार यह पूरा खेल कॉलेज कर्मचारी पीयूष चंद्र भटनागर और उसके सहयोगियों द्वारा अंजाम दिया गया।
छात्रवृत्ति प्रभारी पर गंभीर आरोप
जांच में सामने आया कि छात्रवृत्ति प्रभारी के रूप में कार्यरत पीयूष भटनागर ने खाते की संचालन प्रक्रिया में हेरफेर कर स्वयं को अधिकृत संचालक बनाया और छात्रों के लिए जारी छात्रवृत्ति राशि को अपने नियंत्रण वाले खातों में ट्रांसफर कर लिया।
ईडी के अनुसार अनधिकृत खाते से 42.50 लाख रुपये नकद निकाले गए, जबकि 66.50 लाख रुपये विभिन्न व्यक्तियों के नाम जारी चेकों के जरिए निकाले गए।
करीब एक करोड़ रुपये पहुंचे निजी खातों में
जांच के दौरान यह भी पता चला कि 99.43 लाख रुपये सीधे पीयूष भटनागर के व्यक्तिगत बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए। इसके बाद रकम को विभिन्न बैंक खातों में घुमाकर बीमा पॉलिसियों, नकद निकासी और अन्य निजी खर्चों में इस्तेमाल किया गया।
मामले में छात्रवृत्ति समन्वयक और कॉलेज खातों की अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता रंजना रावत की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है। ईडी के अनुसार उन्होंने खाली चेकों पर हस्ताक्षर किए थे, जिनका बाद में छात्रवृत्ति राशि निकालने और ट्रांसफर करने में उपयोग किया गया।
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7.86 लाख रुपये की संपत्तियां पहले ही हो चुकी हैं अटैच
गौरतलब है कि ईडी ने 27 मई को आरोपी पीयूष भटनागर की 7.86 लाख रुपये मूल्य की चल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क (अटैच) की थीं। इनमें बीमा पॉलिसियां, बैंक खातों में जमा धनराशि और एक होंडा एक्टिवा वाहन शामिल हैं।
ईडी ने बैंक रिकॉर्ड, दस्तावेजी साक्ष्य और पीएमएलए के तहत दर्ज बयानों के आधार पर विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। अब मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कोर्ट की निगरानी में आगे बढ़ेगी।
यह मामला उन छात्रों की छात्रवृत्ति से जुड़ा है जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से आते हैं। ऐसे में करोड़ों रुपये की कथित हेराफेरी ने छात्रवृत्ति वितरण व्यवस्था और संस्थागत निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।




