- हेलीकॉप्टर से पांच उड़ानें, एनआईएम और एसडीआरएफ की टीम ने की तलाश; घटनास्थल पर मिले टेंट और बैग, लेकिन नहीं मिला लापता दल का सुराग
उत्तरकाशी, 2 नवंबर।नीरज उत्तराखंडी
गंगोत्री क्षेत्र के दुर्गम केदारताल ट्रेक पर भारी हिमपात और हिमस्खलन (एवलांच) के चलते लापता हुए आठ ट्रेकर्स और गाइड का तीसरे दिन भी कोई सुराग नहीं मिल पाया है।
खराब मौसम और लगातार हो रही बर्फबारी के कारण सोमवार को भी रेस्क्यू अभियान रोकना पड़ा। तलाशी अभियान के दौरान घटनास्थल के आसपास टेंट और बैग जरूर मिले हैं, लेकिन लापता लोगों का पता नहीं चल सका।
जनपद आपातकालीन परिचालन केंद्र की 2 नवंबर को सुबह 11 बजे जारी संशोधित रिपोर्ट के अनुसार, 30 अक्टूबर को शाम 6:39 बजे ट्रैकिंग एजेंसी ‘सोल सीकर’ के संचालक ने प्रशासन को सूचना दी थी कि गंगोत्री से केदारताल ट्रेकिंग पर गया एक दल वापसी के दौरान भारी हिमपात और हिमस्खलन की चपेट में आ गया। दल के आठ सदस्य करीब चार हजार मीटर की ऊंचाई पर लापता हो गए।
हेलीकॉप्टर से पांच उड़ानें, फिर भी नहीं मिला सुराग
सोमवार सुबह रेस्क्यू अभियान के तहत हेलीकॉप्टर ने पांच उड़ानें भरीं। एनआईएम (नेहरू पर्वतारोहण संस्थान) और एसडीआरएफ की टीमें अलग-अलग चरणों में केदारताल क्षेत्र पहुंचीं और हवाई रेकी के साथ तलाशी अभियान चलाया। लेकिन प्रतिकूल मौसम के कारण अभियान आगे नहीं बढ़ाया जा सका। रेस्क्यू टीमें केदारखड़ग (कच्ची ढांग) बेस कैंप में मौजूद रहीं।
टेंट और बैग मिले, लापता लोगों का पता नहीं
प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार, एक नवंबर को वन विभाग और ट्रैकिंग एजेंसी के नौ सदस्यीय दल को केदारताल के लिए रवाना किया गया था। टीम ने भोजखड़ग के पास बेस कैंप में रात्रि विश्राम किया। सोमवार सुबह भोजखड़ग से आगे बढ़कर टीम करीब नौ बजे केदारखड़ग (कच्ची ढांग) पहुंची और दोपहर दो बजे तक लापता लोगों की संभावित लोकेशन पर तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान टीम को घटनास्थल पर टेंट और बैग मिले। हालांकि, खराब मौसम के चलते टीम को वापस भोजखड़ग बेस कैंप लौटना पड़ा।
परिजनों को दी गई सूचना
आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार, लापता ट्रेकर्स के परिजनों से बातचीत कर उन्हें घटना की जानकारी दे दी गई है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी लगातार अभियान की निगरानी कर रहे हैं।
मौसम बना सबसे बड़ी चुनौती
चार हजार मीटर से अधिक ऊंचाई वाले दुर्गम हिमालयी क्षेत्र में भारी हिमपात, हिमस्खलन की आशंका और खराब दृश्यता राहत एवं बचाव दल के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है। फिलहाल आठों लापता ट्रेकर्स और गाइड की तलाश जारी है। पूरे क्षेत्र में उनकी सुरक्षित बरामदगी की उम्मीद के साथ रेस्क्यू अभियान के अगले चरण का इंतजार है।






