बड़ी खबर: कागजों में किसानों की तरक्की, करोड़ों की मंडी में सन्नाटा।औने-पौने दामों पर बिक रही उपज

नौगांव/उत्तरकाशी। नीरज उत्तराखंडी 

रवाईं घाटी के किसानों को उनकी उपज का बेहतर बाजार और उचित मूल्य दिलाने के उद्देश्य से करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित नौगांव कृषि मंडी एक वर्ष बाद भी संचालन की बाट जोह रही है।

मंडी भवन, गोदाम और अन्य आधारभूत सुविधाएं तैयार होने के बावजूद इसके शुरू न होने से किसानों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।

टमाटर और सेब सीजन शुरू होने से पहले किसानों ने सरकार और प्रशासन से मंडी को तत्काल संचालित करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो उन्हें एक बार फिर अपनी मेहनत की उपज औने-पौने दामों में बेचने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

16 दुकानें तैयार, लेकिन आवंटन प्रक्रिया अधर में

नौगांव के भारी वल्ली क्षेत्र में निर्मित कृषि मंडी परिसर में फल एवं सब्जियों के भंडारण और विपणन के लिए बनाई गई 16 दुकानें अभी तक आवंटन का इंतजार कर रही हैं।

स्थानीय किसानों का कहना है कि मंडी निर्माण कार्य पूरा हुए करीब एक वर्ष बीत चुका है, लेकिन विभागीय स्तर पर संचालन शुरू करने को लेकर कोई ठोस पहल नहीं की गई। इससे करोड़ों रुपये की लागत से बनी यह परियोजना फिलहाल शोपीस बनकर रह गई है।

टमाटर, सेब और सब्जी उत्पादकों को हो रहा नुकसान

रवाईं घाटी के नौगांव, पुरोला और मोरी विकासखंड उत्तराखंड के प्रमुख नगदी फसल उत्पादक क्षेत्रों में शामिल हैं। यहां बड़ी मात्रा में टमाटर, मटर, फ्रेंचबीन, शिमला मिर्च, आलू, नाशपाती और सेब का उत्पादन होता है।

स्थानीय मंडी के अभाव में किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए देहरादून, विकासनगर और अन्य बाहरी मंडियों पर निर्भर रहना पड़ता है। इससे परिवहन लागत बढ़ने के साथ-साथ किसानों को उचित बाजार मूल्य भी नहीं मिल पाता।

2017 में मिली थी मंडी की सौगात

स्थानीय लोगों के अनुसार वर्ष 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने रवाईं घाटी को कृषि मंडी समिति की सौगात दी थी। हालांकि परियोजना को धरातल पर उतरने में लगभग एक दशक का समय लग गया।

अब जब मंडी भवन और सभी आवश्यक सुविधाएं तैयार हो चुकी हैं, तब भी संचालन शुरू न होना किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर रहा है।

जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर उठ रहे सवाल

क्षेत्र के काश्तकारों का कहना है कि सरकार में क्षेत्र से जुड़े कई जनप्रतिनिधि और दायित्वधारी होने के बावजूद मंडी के संचालन को लेकर प्रभावी पहल नहीं हो रही है।

किसानों का मानना है कि यदि मंडी समय पर शुरू हो जाती तो स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार मिलता और बिचौलियों की भूमिका भी काफी हद तक समाप्त हो जाती।

टमाटर और सेब सीजन से पहले संचालन जरूरी

देवराना घाटी फल एवं सब्जी उत्पादक एसोसिएशन के अध्यक्ष जयेंद्र राणा ने कहा कि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार मंडी का संचालन शुरू न होना किसानों के साथ अन्याय है।

उन्होंने बताया कि जून और जुलाई में टमाटर तथा सेब की फसल बाजार में आनी शुरू हो जाती है। ऐसे में सरकार को किसानों के हितों को देखते हुए मंडी समिति को तत्काल संचालित करना चाहिए, ताकि इस सीजन में उत्पादकों को सीधा लाभ मिल सके।

किसानों की सरकार से मांग

क्षेत्र के किसानों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि मंडी परिसर की दुकानों का आवंटन जल्द पूरा किया जाए और कृषि मंडी समिति को तत्काल प्रभाव से शुरू किया जाए।

किसानों का कहना है कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो रवाईं घाटी के हजारों फल एवं सब्जी उत्पादकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

किसानों की उम्मीदें, सरकार का फैसला बाकी

रवाईं घाटी के किसान अब सरकार और प्रशासन के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं। टमाटर और सेब सीजन नजदीक होने के कारण कृषि मंडी का संचालन शुरू करना किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यह भी पढ़ें:

👉 गजब: कागजों में दौड़ी सड़क, ₹16 करोड़ भी उड़ गए! ब्रिडकुल का बड़ा कारनामा
👉 ब्रेकिंग: 4 IAS-2 PCS के तबादले, देंखे लिस्ट 
👉 बड़ी खबर: उत्तराखंड में अब हाइब्रिड वाहनों पर भी लगेगा ग्रीन सेस! प्रस्ताव तैयार, मंत्रिमंडल की मुहर बाकी

Parvatjan Team
Parvatjan Team
Parvatjan Team is dedicated to delivering the latest, accurate, and reliable news from Uttarakhand. We cover local issues, administrative updates, public interest stories, and breaking news in a clear and simple manner.

📢 खबरों को सबसे पहले पाने के लिए पर्वतजन को फॉलो करें

👉 WhatsApp Channel Join करें 👉 WhatsApp Group Join करें 📲 App Download करें

Related Posts