फर्जीवाड़ा: बिना वाहन पहुंचे जारी हो गए फिटनेस सर्टिफिकेट! जांच के घेरे में 100 से ज्यादा वाहन

देहरादून। उत्तराखंड के देहरादून संभाग में वाहनों की फिटनेस प्रमाणन प्रक्रिया में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। परिवहन विभाग की जांच में सामने आया है कि कई वाहनों की फिटनेस बाहरी राज्यों के ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) से जारी दिखाई गई, जबकि संबंधित वाहन उन केंद्रों तक पहुंचे ही नहीं। मामले के सामने आने […]

देहरादून। उत्तराखंड के देहरादून संभाग में वाहनों की फिटनेस प्रमाणन प्रक्रिया में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। परिवहन विभाग की जांच में सामने आया है कि कई वाहनों की फिटनेस बाहरी राज्यों के ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) से जारी दिखाई गई, जबकि संबंधित वाहन उन केंद्रों तक पहुंचे ही नहीं। मामले के सामने आने के बाद परिवहन विभाग में हड़कंप मच गया है और जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

100 से अधिक वाहन जांच के रडार पर

आरटीओ (प्रशासन) संदीप सैनी की निगरानी में चल रही जांच में अब तक करीब 100 वाहन संदिग्ध पाए गए हैं। इनमें हल्के और भारी दोनों श्रेणी के वाहन शामिल हैं।

प्रारंभिक जांच में पाया गया कि यूके-07 सीरीज के कई वाहनों की फिटनेस उत्तर प्रदेश के बिजनौर, मध्य प्रदेश के ग्वालियर, बिहार, राजस्थान समेत अन्य राज्यों के ATS केंद्रों से जारी दर्शाई गई है। हालांकि इन वाहनों के संबंधित केंद्रों तक पहुंचने के कोई ठोस प्रमाण अभी तक नहीं मिले हैं।

ATS सेंटरों और RTO कार्यालयों से मांगा जाएगा रिकॉर्ड

मामले की गंभीरता को देखते हुए परिवहन विभाग ने संबंधित राज्यों के आरटीओ और एआरटीओ कार्यालयों से संपर्क करने की तैयारी शुरू कर दी है। फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करने वाले ATS सेंटरों से भी पूरे रिकॉर्ड और दस्तावेज मांगे जाएंगे।

आरटीओ प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच में संदिग्ध पाए जाने वाले वाहन स्वामियों को किसी प्रकार की राहत नहीं दी जाएगी। जरूरत पड़ने पर फिटनेस प्रमाणपत्र निरस्त करने, वाहन जब्त करने और पंजीकरण संबंधी कार्रवाई भी की जा सकती है।

संगठित नेटवर्क की आशंका, बढ़ सकती है जांच

जांच अधिकारियों के अनुसार मामला केवल कुछ वाहनों तक सीमित नहीं है। 100 से अधिक वाहनों के सामने आने के बाद आशंका जताई जा रही है कि इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय हो सकता है, जो बिना परीक्षण के वाहन मालिकों को फिटनेस प्रमाणपत्र उपलब्ध करा रहा है।

यदि जांच में ATS सेंटरों, एजेंटों और वाहन स्वामियों की मिलीभगत सामने आती है, तो मामला मोटर वाहन अधिनियम के उल्लंघन से आगे बढ़कर धोखाधड़ी और कूटरचना जैसी गंभीर धाराओं तक पहुंच सकता है।

टोल रिकॉर्ड और GPS डेटा से खुलेगा राज

परिवहन विभाग ने जांच को तकनीकी आधार पर आगे बढ़ाने का फैसला किया है। जिन वाहन स्वामियों का दावा होगा कि उनके वाहन संबंधित राज्यों के ATS केंद्रों तक पहुंचे थे, उनसे टोल प्लाजा रसीद, GPS डेटा और यात्रा से जुड़े अन्य प्रमाण मांगे जाएंगे।

अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर आसानी से यह पता लगाया जा सकेगा कि वाहन वास्तव में परीक्षण केंद्र तक गया था या केवल कागजों में ही फिटनेस प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया।

सड़क सुरक्षा के साथ खिलवाड़ का गंभीर मामला

विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल दस्तावेजी अनियमितता नहीं, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा बेहद गंभीर मामला है। किसी भी वाहन की फिटनेस यह प्रमाणित करती है कि वह सड़क पर चलने के लिए सुरक्षित और तकनीकी रूप से सक्षम है।

यदि बिना परीक्षण के फिटनेस प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं, तो यह सीधे तौर पर यात्रियों की जान जोखिम में डालने जैसा है। ATS केंद्रों पर सामान्यतः ब्रेक, सस्पेंशन, उत्सर्जन स्तर, स्टीयरिंग, हेडलाइट और अन्य तकनीकी मानकों की जांच की जाती है।

क्या है ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS)?

ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) एक आधुनिक तकनीकी केंद्र होता है, जहां वाहनों की फिटनेस जांच पूरी तरह मशीनों और डिजिटल सिस्टम के माध्यम से की जाती है। केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के तहत व्यावसायिक वाहनों के लिए फिटनेस परीक्षण अनिवार्य है।

ATS का उद्देश्य फिटनेस जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और सड़क पर केवल सुरक्षित वाहनों के संचालन को सुनिश्चित करना है।

यातायात नियम तोड़ने वालों पर भी चला अभियान

इधर, सड़क सुरक्षा को लेकर आरटीओ (प्रवर्तन) की टीम ने देहरादून में विशेष चेकिंग अभियान चलाया। आरटीओ (प्रवर्तन) डॉ. अनीता चमोला के नेतृत्व में आईएसबीटी, बल्लूपुर चौक, ट्रांसपोर्ट नगर और आशारोड़ी क्षेत्रों में कार्रवाई की गई।

अभियान के दौरान यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले 42 वाहनों का चालान किया गया, जबकि 10 वाहनों को सीज कर दिया गया। नशे में वाहन चलाने वालों पर विशेष निगरानी रखी गई।

दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई : आरटीओ

आरटीओ (प्रशासन) संदीप सैनी ने कहा कि उत्तराखंड में रहकर बाहरी राज्यों के ATS सेंटर गए बिना वाहन फिटनेस कराने का मामला गंभीर है। अब तक करीब 100 वाहन जांच के दायरे में आ चुके हैं। संबंधित ATS सेंटरों से रिकॉर्ड मांगा जाएगा और जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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