देहरादून/हल्द्वानी। उत्तराखंड के पूर्व कृषि निदेशक गौरी शंकर का हृदय गति रुकने (हार्ट अटैक) से आकस्मिक निधन हो गया। उनके निधन की खबर से कृषि विभाग, किसान समुदाय और प्रशासनिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई है।
बताया जा रहा है कि वह हाल ही में दिल्ली से अपना नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराकर लौटे थे। उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार गुरुवार को हल्द्वानी में किया जाएगा।
कृषि विभाग ने खोया अनुभवी नेतृत्व
गौरी शंकर उत्तराखंड कृषि विभाग के उन चुनिंदा अधिकारियों में शामिल थे, जिन्होंने लंबे समय तक विभाग का नेतृत्व किया। उन्होंने 1 जुलाई 2015 से 22 दिसंबर 2023 तक लगभग साढ़े आठ वर्षों तक कृषि निदेशक के पद पर रहते हुए राज्य की कृषि नीतियों और योजनाओं को नई दिशा दी।
उनका कार्यकाल उत्तराखंड कृषि विभाग के सबसे लंबे और प्रभावशाली कार्यकालों में गिना जाता है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार उन्होंने किसानों की समस्याओं के समाधान और कृषि क्षेत्र के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए।

जैविक खेती को दिलाई नई पहचान
अपने कार्यकाल के दौरान गौरी शंकर ने उत्तराखंड में जैविक खेती (Organic Farming) को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने उत्तराखंड स्टेट ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन एजेंसी (USOCA) के साथ मिलकर पर्वतीय क्षेत्रों में जैविक कृषि को नई पहचान दिलाने का कार्य किया।
उनके प्रयासों से राज्य के कई किसान जैविक खेती से जुड़े और कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली।
किसानों तक पहुंचाईं सरकारी योजनाएं
पूर्व कृषि निदेशक ने केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं को किसानों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पीएम-किसान योजना, मिलेट मिशन और कृषि यंत्रीकरण जैसी योजनाओं का लाभ दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों के किसानों तक पहुंचाने के लिए उन्होंने विशेष प्रयास किए।
उनकी कार्यशैली का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाना था।
प्रशासनिक कुशलता के लिए थे प्रसिद्ध
गौरी शंकर को एक कुशल प्रशासक और कृषि विशेषज्ञ के रूप में जाना जाता था। कृषि एवं उद्यान विभाग के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत बनाने तथा विभागीय समन्वय को बेहतर करने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
सहकर्मियों और अधिकारियों के अनुसार वे सरल, सौम्य और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी थे, जो हमेशा किसानों और विभागीय हितों को प्राथमिकता देते थे।
शोक की लहर, दी जा रही श्रद्धांजलि
उनके निधन पर कृषि विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों, किसान संगठनों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। सभी ने इसे उत्तराखंड के कृषि क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।
गौरी शंकर के निधन से उत्तराखंड ने एक ऐसे अधिकारी को खो दिया है, जिसने अपने लंबे सेवाकाल में कृषि विकास और किसान कल्याण के लिए उल्लेखनीय योगदान दिया।





