नई दिल्ली। जून 2026 सोना और चांदी में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए भारी उतार-चढ़ाव वाला महीना साबित हुआ है। पिछले कुछ वर्षों की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज करते हुए मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने और चांदी दोनों की कीमतों में जोरदार कमजोरी देखने को मिली। जहां सोना प्रति 10 ग्राम करीब 17,000 रुपये तक सस्ता हुआ, वहीं चांदी में 51,000 रुपये तक की रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक परिस्थितियों में बदलाव, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के संकेत और निवेशकों की मुनाफावसूली ने कीमती धातुओं पर भारी दबाव बनाया है। हालांकि अब कई निवेशक इसे खरीदारी का अवसर भी मान रहे हैं।
जून 2026 में सोना-चांदी की कीमतों में कितनी गिरावट आई?
एमसीएक्स के आंकड़ों के अनुसार मई के अंत की तुलना में जून के दौरान अब तक दोनों कीमती धातुओं में बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
सोना
- प्रति 10 ग्राम लगभग ₹17,000 तक सस्ता
- करीब 10.36% की गिरावट
चांदी
- प्रति किलोग्राम लगभग ₹51,000 तक की गिरावट
- करीब 18.56% की कमजोरी
यह गिरावट हाल के वर्षों में सबसे बड़ी मासिक गिरावटों में से एक मानी जा रही है।
आखिर सोना-चांदी इतनी तेजी से क्यों टूटे?
1. ईरान-अमेरिका तनाव खत्म होने से घटा सुरक्षित निवेश का आकर्षण: जब वैश्विक तनाव बढ़ता है तो निवेशक सोने को सुरक्षित निवेश (Safe Haven) मानकर खरीदते हैं। लेकिन ईरान-अमेरिका संघर्ष थमने और शांति वार्ता शुरू होने के बाद बाजार में जोखिम लेने की प्रवृत्ति बढ़ी, जिससे सोने की मांग कमजोर पड़ गई।
2. अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त संकेत: बाजार पर सबसे बड़ा असर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के उस बयान का पड़ा जिसमें संकेत दिए गए कि इस वर्ष ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है। ऊंची ब्याज दरों का सीधा असर सोने और चांदी पर पड़ता है क्योंकि ऐसे समय निवेशक बॉन्ड और डॉलर आधारित निवेश को प्राथमिकता देने लगते हैं।
3. मजबूत डॉलर बना बड़ा कारण: फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के बाद डॉलर मजबूत हुआ। डॉलर मजबूत होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना और चांदी महंगे हो जाते हैं, जिससे उनकी मांग घटती है और कीमतों पर दबाव बढ़ता है।
4. निवेशकों की भारी मुनाफावसूली: सोना और चांदी पहले लगातार नई ऊंचाइयों पर पहुंच चुके थे। ऐसे में बड़े निवेशकों ने ऊंचे स्तर पर जमकर मुनाफावसूली की, जिससे बिकवाली और तेज हो गई।
5. शेयर बाजार की ओर बढ़ा निवेश: वैश्विक तनाव कम होने के बाद निवेशकों का रुझान फिर से इक्विटी बाजार की ओर बढ़ा। सुरक्षित निवेश छोड़कर शेयर बाजार में निवेश बढ़ने से भी सोना-चांदी की कीमतों पर दबाव बना।
अब तक कितनी गिर चुकी हैं कीमतें?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमती धातुओं में बड़ी कमजोरी देखने को मिली है।
- सोना जनवरी 2026 के रिकॉर्ड उच्च स्तर से करीब 29% तक टूट चुका है।
- चांदी अपने उच्च स्तर से 50% से अधिक गिरावट दर्ज कर चुकी है।
क्या अभी सोना-चांदी खरीदना सही रहेगा?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार इतनी बड़ी गिरावट के बाद लंबी अवधि के निवेशकों के लिए चरणबद्ध निवेश (Systematic Buying) की रणनीति बेहतर हो सकती है। हालांकि अल्पकाल में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है क्योंकि आगे की दिशा अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसलों, डॉलर इंडेक्स और वैश्विक आर्थिक हालात पर निर्भर करेगी।
निवेशकों के लिए सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि घबराकर निवेश बेचने के बजाय बाजार की चाल पर नजर बनाए रखें। यदि कीमतों में और गिरावट आती है तो लंबी अवधि के निवेशक धीरे-धीरे खरीदारी कर सकते हैं। वहीं शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को वैश्विक संकेतों और अमेरिकी मौद्रिक नीति पर विशेष नजर रखने की सलाह दी जा रही है।





