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नैनीताल।(रिपोर्ट-कमल जगाती)
टिहरी बांध परियोजना से जुड़ी एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। प्रतापनगर विधायक विक्रम सिंह नेगी द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि टिहरी बांध परियोजना को मंजूरी देते समय रखी गई महत्वपूर्ण शर्तों का पालन आज तक नहीं किया गया है।
न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।
टिहरी बांध की मंजूरी की शर्तों के उल्लंघन का आरोप
याचिका में कहा गया है कि वर्ष 1990 में टिहरी बांध परियोजना को भारत सरकार की मंजूरी देते समय यह अनिवार्य शर्त रखी गई थी कि ‘भागीरथी रिवर मैनेजमेंट अथॉरिटी’ का गठन किया जाएगा। इस अथॉरिटी को राज्य सरकार द्वारा पर्याप्त वित्तीय सहायता दी जानी थी ताकि बांध परियोजना के पर्यावरणीय, भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक प्रभावों की नियमित निगरानी की जा सके।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि राज्य गठन के 26 वर्ष बाद भी इस अथॉरिटी को सरकार की ओर से कोई फंड उपलब्ध नहीं कराया गया, जिससे इसकी कार्यप्रणाली लगभग ठप पड़ी हुई है।
2005 में कानून बना, लेकिन फंड नहीं मिला
याचिका में यह भी बताया गया कि वर्ष 2005 में उत्तराखंड विधानसभा ने एक विशेष अधिनियम पारित किया था। अधिनियम की धारा-12 में स्पष्ट प्रावधान है कि भागीरथी रिवर वैली अथॉरिटी को सरकार द्वारा वित्तीय सहायता दी जाएगी।
इसके बावजूद आज तक अथॉरिटी को निर्धारित फंड नहीं दिया गया, जबकि कानून में इसके लिए स्पष्ट व्यवस्था मौजूद है।
टिहरी डैम के राजस्व का 20% खर्च करने का था प्रावधान
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अभिजय नेगी ने न्यायालय को बताया कि अधिनियम के अनुसार टिहरी बांध से होने वाले राजस्व का 20 प्रतिशत हिस्सा भागीरथी रिवर वैली अथॉरिटी के विकास और सुधार कार्यों पर खर्च किया जाना चाहिए था।
उन्होंने दावा किया कि अब तक इस मद में शून्य प्रतिशत राशि खर्च की गई है, जो कानून और परियोजना की मूल शर्तों के विपरीत है।
विधानसभा में भी उठा था मुद्दा
प्रतापनगर विधायक विक्रम सिंह नेगी ने यह मुद्दा पूर्व में विधानसभा में भी उठाया था। उन्होंने सरकार से पूछा था कि अथॉरिटी को निर्धारित फंड क्यों नहीं दिया जा रहा है।
याचिका में कहा गया है कि उस समय ऊर्जा विभाग का दायित्व संभाल रहे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से इस संबंध में स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया था।
हाईकोर्ट ने मांगा सरकार से जवाब
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के अधिवक्ता से पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। अब सभी की निगाहें सरकार के जवाब और आगामी सुनवाई पर टिकी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि याचिका में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला टिहरी बांध परियोजना से जुड़ी निगरानी व्यवस्था और पर्यावरणीय शर्तों के अनुपालन पर बड़े सवाल खड़े कर सकता है।





