एक्सक्लूसिव

एक्सक्लूसिव : राशन विक्रेताओं को हाईकोर्ट का डंडा। खुलेंगी मिट्टी तेल कालाबाजारी की पोल। एक रिट पर अहम आदेश

उच्च न्यायालय नैनीताल ने सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेताओं की बिक्री रजिस्टर एवं गैस कनेक्शन कैटेगरी की सूचना देने से बचने को दायर की गई याचिका को डिस्पोज करके सूचना देने के आदेश दिया है।

ह्यूमन राइट एसोसिएशन ने वर्ष 2017 में  राशन विक्रेताओं द्वारा  मिट्टी तेल के वितरण के संबंध में सूचना मांगी थी।

गौरतलब है कि मिट्टी तेल की कालाबाजारी के कारण उपभोक्ताओं को मिट्टी तेल से वंचित रहना पड़ता है। किंतु  सूचना आयोग के आदेश के बावजूद  राशन विक्रेताओं ने  सूचनाएं नहीं दी।  बल्कि  आयोग के आदेश के विरुद्ध हाईकोर्ट चले गए थे।  हाई कोर्ट ने राशन विक्रेताओं को झटका देते हुए सूचना उपलब्ध कराने का आदेश दिया है।

ह्यूमन राइट एसोसिएशन के अध्यक्ष अरविंद शर्मा ने बताया कि एसोसिएशन महासचिव चुग के पक्ष में माननीय सूचना आयोग द्वारा 10 जुलाई 2019 को सूचना उपलब्ध कराने के आदेश के विरुद्ध माननीय उच्च न्यायालय नैनीताल के समक्ष उचित दर विक्रेताओं ने राममूर्ति गुप्ता एवं 10 अन्य के माध्यम से रिट दायर की थी।

एसोसिएशन महासचिव भास्कर चुग को  ऐसा होने की पूर्व में ही आशंका थी, इसलिए उन्होंने पहले ही कैविएट दाखिल कर रखी थी।

माननीय उच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीश श्री सुधांशु धूलिया ने प्रकरण में दाखिल सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेताओं की ओर से राममूर्ति गुप्ता की रिट की सुनवाई की एवं भास्कर चुग की कैविएट का संज्ञान लेते हुए अपना फैसला दिया। रिट को डिस्पोज कर दिया।

माननीय उच्च न्यायालय के रिट  संख्या 2788 ऑफ 2019 राममूर्ति एवं अन्य बनाम उत्तराखंड राज्य एवं अन्य पर दिए गए आदेश के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं।

1.आदेश में पेटीशनर्स को राज्य का प्रतिनिधि माना गया है क्योंकि वे  सरकार के तहत आवश्यक वस्तुओं का एवं फ़ूड ग्रेंस का वितरण कर रहे हैं जो कि राज्य से सब्सिडी प्राप्त है।

2. पेटीशनर्स सरकार के सोशल बेनिफिट एक्ट के तहत कार्य कर रहे हैं जिसके अंतर्गत आवश्यक वस्तुए राशन कार्ड धारकों को कम दाम पर प्रोवाइड कराई जाती है।

3. माननीय न्यायालय ने पाया है कि चाही गई सूचना पेटीशनर को देनी ही होगी।

4. पेटीशनर्स ने आगे यह भी कहा है कि उनके पास वांछित  सूचना धारित नहीं है।

5. माननीय न्यायालय ने यह पाया है कि पेटीशनर्स का यह कहना गलत है।

6. माननीय न्यायालय ने इसी संबंध में नैनीताल के जिला पूर्ति अधिकारी श्री मनोज कुमार को बुलाया तो वह  स्वयं माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष उपस्थित हुए।

7. जिला पूर्ति अधिकारी नैनीताल ने माननीय न्यायालय के समक्ष स्वीकार किया कि वांछित सूचना उचित दर विक्रेताओं के पास धारित है इसलिए प्रदान करने योग्य है।

8. इसलिए माननीय न्यायालय मानता है कि वांछित सूचना पेटीशनर्स के पास धारित है और प्रदान करने के योग्य है।

9. माननीय न्यायालय ने यह कहा कि पेटीशनर्स के पास यदि वांछित सूचना नहीं है और उन्हें तृतीय पक्ष से मांगनी है तो वे अपना स्पष्टीकरण जिला पूर्ति अधिकारी को दे सकते हैं।

10. तत्पश्चात जिला पूर्ति अधिकारी की जिम्मेदारी है कि वह पेटीशनर्स के विरुद्ध एक्शन ले अगर वह महसूस करते हैं कि उचित दर विक्रेता मांगी गई सूचना को अवरुद्ध कर रहे हैं और नियम अनुसार प्रदान नहीं कर रहे हैं तो उनके विरुद्ध कार्यवाही करें।

एसोसिएशन महासचिव भास्कर चुग ने बताया कि राशन विक्रेताओं द्वारा भ्रष्टाचार करने के लिए आम जनता के बीच यह भ्रम फैलाया हुआ है कि मिट्टी के तेल की आपूर्ति पिछले कई वर्ष से नहीं हुई है और इसी अफवाह का लाभ उठाकर कई वर्षों से जनता के हक का मिट्टी का तेल ब्लैक किया जा रहा है। वर्ष 2017 में ही 18 लाख लीटर से अधिक मिट्टी के तेल की आमद हुई है जो ब्लैक कर दिया गया है और यही स्थिति पूरे उत्तराखंड में है।  सूचना प्राप्त होते ही वह भ्रष्टाचार के एक बहुत बड़े प्रकरण का खुलासा करेंगे, जिसमें बड़े-बड़े विभागीय अधिकारी व उचित दर विक्रेता लिप्त है।

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