मसूरी में अवैध वृक्ष कटाई का मामला: वन विभाग ने भूस्वामी के खिलाफ शुरू की कानूनी प्रक्रिया

देहरादून जिले के मसूरी क्षेत्र में भूमि माफिया की गतिविधियां अब वन संबंधी नियमों की खुली अवहेलना कर रही हैं। हालिया घटना कंपनी गार्डन के निकट कंडी लॉज हालोक रोड पर सामने आई है, जहां अपराधियों ने एक रात में सात कीमती वृक्षों को काटकर गिरा दिया। यह घटना न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण के लिए […]

देहरादून जिले के मसूरी क्षेत्र में भूमि माफिया की गतिविधियां अब वन संबंधी नियमों की खुली अवहेलना कर रही हैं। हालिया घटना कंपनी गार्डन के निकट कंडी लॉज हालोक रोड पर सामने आई है, जहां अपराधियों ने एक रात में सात कीमती वृक्षों को काटकर गिरा दिया। यह घटना न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण के लिए खतरा है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाती है। स्थानीय निवासियों की शिकायत पर वन विभाग सक्रिय हुआ। सूचना प्राप्त होते ही रेंजर महेंद्र चौहान की अगुवाई में टीम घटनास्थल पर पहुंची और कटे वृक्षों के हिस्से, लकड़ी के टुकड़े तथा काटने के उपकरणों को कब्जे में लिया।

 

वन रेंजर महेंद्र चौहान ने जानकारी दी कि भूस्वामी ने बिना विभागीय मंजूरी के इन सात वृक्षों को गैरकानूनी तरीके से काटा। कटे वृक्षों में संरक्षित श्रेणी की प्रजातियां जैसे खाखसी, कौल, मंसूरा और भमोरा शामिल हैं, जो पारिस्थितिकी संतुलन में अहम भूमिका निभाती हैं। जांच से भूस्वामी का नाम हरप्रीत सिंह सामने आया, जो जीएमएस रोड का निवासी है। वन विभाग ने भारतीय वन अधिनियम के प्रावधानों के तहत उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।

 

वन विभाग के मुताबिक, भारतीय वन अधिनियम 1927 के अनुसार बिना स्वीकृति वृक्ष काटना अपराध की श्रेणी में आता है। दोष सिद्ध होने पर अर्थदंड, सामग्री की जब्ती और जेल की सजा हो सकती है। संरक्षित प्रजातियों के मामले में दंड और सख्त होता है। विभाग ने भूस्वामी के विरुद्ध अधिनियम की कई धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की है। घटनास्थल पर 11 खड्ढे भी मिले, जो संभवतः निर्माण कार्य के उद्देश्य से खोदे गए थे।

विभाग ने तुरंत कदम उठाते हुए इन खड्ढों को भरवाकर अवैध निर्माण की संभावना को रोका। रेंजर महेंद्र चौहान ने साफ कहा कि मसूरी जैसे पर्यावरणीय रूप से नाजुक इलाके में किसी भी गैरकानूनी वृक्ष कटाई या भवन निर्माण को सहन नहीं किया जाएगा। भूमि माफिया के खिलाफ सबसे कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इस घटना से स्थानीय समुदाय और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों में गुस्सा व्याप्त है। उनका मानना है कि यदि ऐसे प्रकरणों पर तत्काल सख्ती न बरती गई, तो मसूरी की प्राकृतिक सुंदरता और हरी-भरी संपदा पर गंभीर संकट मंडरा सकता है।

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