देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा के पूर्व सचिव और वरिष्ठ कांग्रेस नेता जगदीश चंद्र का निधन हो गया है। उनके निधन की खबर से प्रदेश के प्रशासनिक, राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई है।
कुछ दिन पहले पौड़ी गढ़वाल के सतपुली क्षेत्र में हुए एक हादसे में गंभीर रूप से घायल होने के बाद उनका इलाज देहरादून के अस्पताल में चल रहा था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।
सतपुली में पैर फिसलने से हुए थे गंभीर घायल
प्राप्त जानकारी के अनुसार जगदीश चंद्र हाल ही में पौड़ी गढ़वाल के सतपुली क्षेत्र में गांवों के भ्रमण पर गए हुए थे। इसी दौरान अचानक उनका पैर फिसल गया, जिससे वे गिर पड़े और गर्दन के पास गंभीर चोट लग गई। हादसे के बाद उन्हें तत्काल देहरादून लाया गया और कैलाश अस्पताल में भर्ती कराया गया।
अगले दिन उनकी हालत को गंभीर देखते हुए चिकित्सकों ने ऑपरेशन की सलाह दी। बेहतर इलाज के लिए उन्हें कैलाश अस्पताल से देहरादून स्थित मैक्स अस्पताल रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
रिटायरमेंट के बाद कांग्रेस में हुए थे सक्रिय
सरकारी सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद जगदीश चंद्र ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा था। उन्होंने कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण की और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।
बताया जा रहा है कि वे आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुटे हुए थे और क्षेत्र में लगातार जनसंपर्क अभियान चला रहे थे। गांवों का दौरा भी उनकी इसी राजनीतिक सक्रियता का हिस्सा था। उनके अचानक निधन को कांग्रेस पार्टी के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है।
विधानसभा सचिव के रूप में निभाई अहम जिम्मेदारी
जगदीश चंद्र उत्तराखंड विधानसभा सचिवालय के सबसे अनुभवी अधिकारियों में गिने जाते थे। विधानसभा सचिव के रूप में उन्होंने लंबे समय तक अपनी सेवाएं दीं और संसदीय परंपराओं एवं विधायी प्रक्रियाओं के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
विधायी नियमों की गहरी समझ, प्रशासनिक दक्षता और सरल व्यक्तित्व के कारण वे अधिकारियों, कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच काफी सम्मानित थे। जटिल प्रशासनिक और कानूनी मामलों के समाधान में उनकी विशेष पहचान थी।
राजनीतिक और प्रशासनिक जगत में शोक
जगदीश चंद्र के निधन पर विधानसभा सचिवालय के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ-साथ कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, जनप्रतिनिधियों और नौकरशाहों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। सभी ने उनके निधन को उत्तराखंड के प्रशासनिक और राजनीतिक क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।
उनके निधन से न केवल कांग्रेस पार्टी बल्कि उत्तराखंड के प्रशासनिक ढांचे ने भी एक अनुभवी और सम्मानित व्यक्तित्व को खो दिया है।





