त्यूणी/देहरादून।27 मई 2026-नीरज उत्तराखंडी
चकराता वन प्रभाग की बावर रेंज अंतर्गत ग्राम पंचायत कूणा के खेड़ा, जरसू, डौंरा और बौराड़ क्षेत्र में मंगलवार को भीषण दावानल ने भारी तबाही मचा दी।
जंगलों में लगी आग तेजी से फैलते हुए सेब और नाशपाती के बगीचों तक पहुंच गई, जिससे कई फलदार पेड़, घास के मैदान और ग्रामीणों की छानियां आग की भेंट चढ़ गईं। आग की लपटों और धुएं से पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार तेज हवा और सूखे जंगलों के कारण आग ने कुछ ही घंटों में विकराल रूप धारण कर लिया। आग को बढ़ता देख ग्रामीणों ने तत्काल वन विभाग को सूचना दी, जिसके बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची।
देर रात तक वन विभाग के कर्मचारियों, स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभालते हुए आग पर काबू पाने का प्रयास किया। कड़ी मशक्कत के बाद देर रात आग को काफी हद तक नियंत्रित कर लिया गया।
हालांकि बुधवार सुबह एक बार फिर मेन्द्रथ क्षेत्र के समीप जंगल में आग लगने की सूचना मिलने से ग्रामीणों और प्रशासन की चिंताएं बढ़ गईं। क्षेत्र में लगातार हो रही आगजनी की घटनाओं से लोगों में रोष व्याप्त है।
स्थानीय जागरूक नागरिक व्रजेश कुमार ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए लोगों से जंगलों को बचाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष दावानल से जंगलों, वन्यजीवों और ग्रामीणों की आजीविका को भारी नुकसान पहुंचता है, लेकिन इसके बावजूद आग लगाने वाले असामाजिक तत्वों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और वन विभाग से मांग की है कि जंगलों में आग लगाने वालों की पहचान कर उनके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने, फायर लाइन बनाने और ग्रामीण स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने की भी मांग उठाई गई है।
दावानल की लगातार बढ़ती घटनाओं ने पर्यावरण संरक्षण और वन सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते प्रभावी रोकथाम नहीं की गई तो आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह हो सकती है।




