पुरोला/उत्तरकाशी, 5 जुलाई 2026।नीरज उत्तराखंडी
ग्रामीण क्षेत्रों को सड़क सुविधा से जोड़ने के सरकारी दावों के बीच मोरी विकासखंड की ग्राम पंचायत पोखरी आज भी सड़क से वंचित है। सड़क न होने की वजह से यहां बीमार, गर्भवती महिलाओं और दुर्घटना में घायल लोगों को आज भी चार किलोमीटर तक पैदल पीठ पर उठाकर मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। शुक्रवार को हुई एक घटना ने एक बार फिर गांव की बदहाल स्थिति उजागर कर दी।
जानकारी के अनुसार पोखरी निवासी 35 वर्षीय संगीता देवी, पत्नी चैन सिंह, खेत में काम करने के दौरान पैर फिसलने से गंभीर रूप से घायल हो गईं। हादसे में उनके पैर में फ्रैक्चर हो गया। गांव तक मोटर मार्ग नहीं होने के कारण परिजनों और ग्रामीणों ने उन्हें चार किलोमीटर तक बारी-बारी से पीठ पर उठाकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया। इसके बाद वाहन की व्यवस्था कर पहले उन्हें नैटवाड़ और फिर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोरी ले जाया गया।
सीएचसी मोरी में प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड जांच के लिए उन्हें उपजिला चिकित्सालय पुरोला रेफर कर दिया।
हर आपात स्थिति में दोहरानी पड़ती है यही मुश्किल
ग्रामीण सुनील कुमार ने बताया कि पोखरी गांव में किसी भी आपात स्थिति के दौरान मरीजों को सड़क तक पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। गांव से मुख्य सड़क की दूरी करीब चार किलोमीटर है, जिसे मरीजों को पीठ पर उठाकर तय करना पड़ता है। कई बार सड़क पर भी समय पर वाहन उपलब्ध नहीं हो पाता, ऐसे में मरीजों को नैटवाड़ तक खच्चरों या ग्रामीणों के सहारे ले जाना पड़ता है। इससे इलाज में देरी होने का खतरा बना रहता है।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से सड़क निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक गांव को मोटर मार्ग से नहीं जोड़ा जा सका है। बरसात और आपात परिस्थितियों में यह समस्या और गंभीर हो जाती है।
सर्वे पूरा, वन स्वीकृति का इंतजार
प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के सहायक अभियंता सुभाष दोरियाल ने बताया कि पोखरी मोटर मार्ग का सर्वेक्षण पूरा हो चुका है। वर्तमान में वन भूमि की स्वीकृति और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है। आवश्यक अनुमतियां मिलने के बाद सड़क निर्माण के लिए टेंडर जारी किए जाएंगे।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि पोखरी मोटर मार्ग की स्वीकृति और निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए, ताकि भविष्य में किसी घायल या गंभीर मरीज को इलाज के लिए पीठ पर ढोने की मजबूरी न झेलनी पड़े। उनका कहना है कि सड़क केवल सुविधा नहीं, बल्कि पहाड़ के दूरस्थ गांवों के लिए जीवनरक्षक आवश्यकता है।





