काशीपुर।
उत्तराखंड में विधायक निधि के उपयोग को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 2022-23 से दिसंबर 2025 तक प्रदेश के विधायकों को मिली कुल निधि का केवल 69 प्रतिशत ही खर्च हो पाया है, जबकि 31 प्रतिशत राशि अब भी खर्च होना बाकी है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी इस मामले में औसत से पीछे हैं और उन्होंने अपनी विधायक निधि का सिर्फ 47 प्रतिशत ही खर्च किया है।
RTI से हुआ बड़ा खुलासा
काशीपुर निवासी RTI कार्यकर्ता नदीम उद्दीन को ग्राम्य विकास आयुक्त कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, दिसंबर 2025 तक कुल 1,31,400 लाख रुपये की विधायक निधि उपलब्ध कराई गई थी। इसमें से केवल 91,124.29 लाख रुपये (69%) खर्च हुए हैं, जबकि 40,261.71 लाख रुपये (31%) अब भी शेष हैं।
किन मंत्रियों का कैसा प्रदर्शन?
मंत्रियों में विधायक निधि खर्च के आंकड़े भी अलग-अलग रहे—
- सतपाल महाराज: 63%
- गणेश जोशी: 79%
- डॉ. धन सिंह रावत: 42%
- सुबोध उनियाल: 54%
- रेखा आर्य: 62%
- सौरभ बहुगुणा: 89%
वहीं हाल ही में मंत्री बने विधायकों में—
- खजान दास: 82%
- प्रदीप बत्रा: 88%
- मदन कौशिक: 64%
- राम सिंह कैड़ा: 69%
टॉप और बॉटम पर कौन?
प्रदेश में सबसे ज्यादा निधि खर्च करने वाले विधायकों में फुरकान अहमद और रवि बहादुर (92%) पहले स्थान पर हैं।
वहीं सबसे कम खर्च करने वालों में किशोर उपाध्याय (30%) शीर्ष पर हैं, जबकि मुख्यमंत्री धामी भी 47% खर्च के साथ निचले समूह में शामिल हैं।
औसत से पीछे कई विधायक
राज्य के औसत 69% से कम निधि खर्च करने वाले विधायकों की संख्या भी काफी अधिक है, जिनमें प्रीतम सिंह, सुबोध उनियाल, मदन कौशिक, रेखा आर्य और अन्य कई नाम शामिल हैं।
क्या कहते हैं आंकड़े?
यह आंकड़े दर्शाते हैं कि विधायक निधि का पूर्ण उपयोग नहीं हो पा रहा है, जिससे विकास कार्यों पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर निधि का उपयोग किया जाए तो स्थानीय स्तर पर विकास को और गति मिल सकती है।
RTI से सामने आए ये आंकड़े उत्तराखंड में विकास कार्यों की रफ्तार पर सवाल खड़े करते हैं। अब देखना होगा कि शेष अवधि में विधायक अपनी बची हुई निधि का कितना प्रभावी उपयोग कर पाते हैं।




