एक्सक्लूसिव खुलासा

खुलासा -2 : नियोजन विभाग की जमीन पर कोस्टगार्ड का शिलान्यास। पानी मे बहे 19 लाख

विनोद कोठियाल, देहरादून

अपनी डोईवाला विधानसभा की जिस भूमि पर 26 जून को मुुुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कोस्ट गार्ड भर्ती कार्यालय का शिलान्यास किया गया है, वह जमीन पहले ही अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय की स्थापना तथा भवन निर्माण के लिए नियोजन विभाग को दी जा चुकी है।

पानी मे बहे 19 लाख

इस भूमि पर भवन बनाने के लिए डीपीआर ग्यारह करोड़ की है और उन्नीस लाख पचास हजार अवमुक्त हो गये हैं। यही नहीं नियोजन विभाग ने कार्यदायी संस्था ब्रिडकुल से इस पर भवन निर्माण का कार्य भी शुरू करा दिया था। ब्रिडकुल इस भूमि की सॉइल टेस्टिंग से लेकर,सर्वे, भवन की डिजाइन, डीपीआर तक तैयार कर दी है तथा 19 लाख रुपए तक भी खर्च कर चुकी है।

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ब्रिडकुल को नही जानकारी

ताज्जुब की बात यह है कि ब्रिडकुल को अभी तक इस बात की कोई आधिकारिक जानकारी तक नहीं है कि जिस जमीन पर वे भवन निर्माण कर रहे हैं, वह किसी और को आवंटित की जा चुकी है। जबकि ब्रिडकुल उत्तराखंड की सरकारी कार्यदाई संस्था है।

अब मुख्यमंत्री द्वारा नए कार्यालय का शिलान्यास करने से  नियोजन विभाग तथा ब्रिडकुल के अधिकारियों से कुछ कहते नहीं बन रहा है।

नियोजन की भूमि पर कोस्टगार्ड का शिलान्यास से सवाल

जिलाधिकारी देहरादून ने 24 अक्टूबर 2017 को ‘भूमि सांख्यिकी सुदृढ़ीकरण परियोजना’ के अंतर्गत निदेशालय की स्थापना के लिए यह भूमि निशुल्क आवंटित कर दी थी।

कुआं वाला देहरादून में नियोजन विभाग के पास कुल .28601 हेक्टेयर भूमि है।

गौरतलब है कि वर्तमान में यह भूमि खसरा खतौनी मे नियोजन विभाग के नाम भी चढी हुई है। इस परियोजना के लिए बाकायदा शासन की भी सहमति ली गई थी तथा उद्धरण खतौनी में यह अंकित है कि यदि यह भूमि प्रस्तावित कार्य से भिन्न प्रयोजन के लिए प्रयोग में लाई जाएगी तो उसके लिए मूल विभाग से पुनः अनुमोदन प्राप्त करना होगा, किंतु कोस्ट गार्ड भर्ती कार्यालय खुलवाने के लिए मूल विभाग अर्थात राजस्व विभाग से भी कोई अनुमति नहीं ली गई।

निजी भूमि भी कब्जाई

पर्वतजन यह पहले ही बता चुका है कि कोस्ट गार्ड कार्यालय खोलने के लिए मुकेश नाम के एक निजी व्यक्ति की भी काफी भूमि जबरन कब्जा ली गई है।और वर्तमान मे उनकी कोई सुनवाई भी नही हो रही है।

इसके पीछे संभवत एक बड़ा कारण यह है कि कोस्ट गार्ड भर्ती कार्यालय के नाम पर करोड़ों रुपए मिलने की संभावना है, इसलिए आनन-फानन में कुआंवाला मे अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय का निर्माण की बजाय कोस्टगार्ड कार्यालय का शिलान्यास कर दिया गया।

सब सीएम त्रिवेंद्र की विधान सभा मे ही क्यों

अहम सवाल यह है नियोजन विभाग के लाखों रुपए खर्च होने के बाद इसी जगह पर दूसरा कार्यालय क्यों खुल रहा है !

सभी कुछ सीएम की ही विधानसभा मे क्यों  !

क्या त्रिवेंद्र अपनी ही विधानसभा डोईवाला के ही सीएम हैं ! क्या देहरादून अथवा उत्तराखंड में जगह की कमी हो गई है !

क्या सीएम त्रिवेंद्र के लिए राज्य के लाखों रुपये की बर्बादी के कोई मायने नही हैं !

अथवा इसके पीछे कोई और बड़ा निहितार्थ है !

यह अभी समय के गर्भ मे है।

पर्वतजन अपने पाठकों से अनुरोध करता है कि यदि यह खबर आपको अच्छी लगी हो तो शेयर जरूर कीजिएगा

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