रैगिंग से हिला दून मेडिकल कॉलेज, विश्वविद्यालय करेगा बदसलूकी रोकथाम समिति का पुनर्गठन

राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में हाल ही में कनिष्ठ छात्रों के खिलाफ हुई गंभीर बदसलूकी की घटना ने संस्थान के प्रशासन और इससे जुड़े विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी पर बहस छेड़ दी है। इस मामले की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए हेमवती नंदन बहुगुणा मेडिकल विश्वविद्यालय (एचएनबीजीयू) ने बदसलूकी रोकथाम के तंत्र को अधिक प्रभावी […]

राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में हाल ही में कनिष्ठ छात्रों के खिलाफ हुई गंभीर बदसलूकी की घटना ने संस्थान के प्रशासन और इससे जुड़े विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी पर बहस छेड़ दी है। इस मामले की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए हेमवती नंदन बहुगुणा मेडिकल विश्वविद्यालय (एचएनबीजीयू) ने बदसलूकी रोकथाम के तंत्र को अधिक प्रभावी बनाने के उपाय शुरू कर दिए हैं।

 

इस बदसलूकी की शिकायत में एमबीबीएस के नौ वरिष्ठ छात्रों को संस्थान और छात्रावास से बाहर कर दिया गया है। इनमें से दो छात्रों पर निष्कासन के अलावा 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी थोपा गया है। इस घटना ने मेडिकल कॉलेज परिसर की सुरक्षा प्रणाली की कमजोरियों को उजागर कर दिया है।

 

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, एचएनबी मेडिकल विश्वविद्यालय वर्ष 2026 के लिए राजकीय दून मेडिकल कॉलेज की संबद्धता नवीनीकरण के दौरान बदसलूकी रोकथाम समिति के सदस्यों में परिवर्तन कर सकता है। विश्वविद्यालय का विचार है कि वर्तमान प्रणाली ऐसी घटनाओं को नियंत्रित करने में अपर्याप्त सिद्ध हुई है।

 

घटना से छात्रों में असुरक्षा की भावना

 

छात्रावास में दो कनिष्ठ छात्रों पर वरिष्ठ छात्रों द्वारा सामूहिक हमले की घटना ने कॉलेज के अन्य छात्रों में भी भय व्याप्त कर दिया है। छात्र अब छात्रावास की सुरक्षा और प्रशासनिक भूमिका की विश्वसनीयता पर संदेह व्यक्त कर रहे हैं।

 

एनएमसी और यूजीसी की ओर से कार्रवाई

 

इस बदसलूकी की घटना पर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने ध्यान दिया है। यूजीसी ने एचएनबी मेडिकल विश्वविद्यालय से पूरे प्रकरण पर स्पष्टीकरण मांगा था। इसके बाद विश्वविद्यालय ने दून मेडिकल कॉलेज से विस्तृत विवरण प्राप्त किया।

 

बदसलूकी रोकथाम समिति को सशक्त बनाया जाएगा

 

विश्वविद्यालय प्रशासन अब ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए बदसलूकी रोकथाम समिति का पुनर्गठन करने की योजना बना रहा है। इसमें बाहरी विशेषज्ञों की भागीदारी बढ़ाना, निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना और शिकायतों का शीघ्र समाधान जैसे कदम शामिल हो सकते हैं।

 

विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि बदसलूकी को किसी भी रूप में सहन नहीं किया जाएगा और दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

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