भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने बुधवार को मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रेपो रेट को 5.5 प्रतिशत पर स्थिर रखने का फैसला किया है।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी कि समिति ने आम सहमति से यह निर्णय लिया है। साथ ही, मौद्रिक नीति का रुख न्यूट्रल बनाए रखा गया है, यानी भविष्य में परिस्थितियों के अनुसार रेट में बदलाव की गुंजाइश बनी रहेगी।
ग्राहकों को EMI पर नहीं मिलेगी राहत
रेपो रेट जस की तस रहने से होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरों में बदलाव की संभावना नहीं है। यानी ग्राहकों को EMI में कोई तत्काल राहत नहीं मिलने वाली।
रेपो रेट वह दर है जिस पर कमर्शियल बैंक RBI से कर्ज लेते हैं। इसमें कटौती होने पर बैंकों के लिए लोन सस्ता हो जाता है और वे ग्राहकों को भी कम ब्याज दर पर लोन ऑफर करते हैं। लेकिन जब RBI रेपो रेट को स्थिर रखता है या बढ़ाता है तो EMI पर राहत नहीं मिलती।
रेपो रेट और FD रेट का कनेक्शन
- रेपो रेट घटने पर: बैंकों के पास सस्ती लिक्विडिटी आ जाती है। ऐसे में उन्हें डिपॉजिट आकर्षित करने के लिए ज्यादा ब्याज देने की जरूरत नहीं होती। इसलिए कई बैंक FD रेट्स घटा देते हैं।
- रेपो रेट बढ़ने पर: बैंकों के लिए कर्ज महंगा हो जाता है। लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए वे ग्राहकों को ज्यादा ब्याज ऑफर करते हैं। यानी इस स्थिति में FD रेट्स बढ़ने की संभावना रहती है।
लगातार दूसरी बार रेपो रेट जस की तस
यह लगातार दूसरी बार है जब RBI ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया।
- फरवरी से जून 2025 के बीच RBI ने कुल 1% की कटौती की थी।
- जून की पॉलिसी में 0.5% की कमी की गई थी।
- फरवरी और अप्रैल की नीतिगत समीक्षा में 0.25-0.25% की कटौती हुई थी।
GDP और महंगाई का नया अनुमान
RBI ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए GDP ग्रोथ रेट के अनुमान को बढ़ाकर 6.8% कर दिया है। पहले यह अनुमान 6.5% था।
वहीं, खुदरा महंगाई (Retail Inflation) का अनुमान घटाकर 2.6% कर दिया गया है, जबकि पहले यह 3.1% आंका गया था।



