एक्सक्लूसिव: “सेक्स कांड” छाया है फेसबुक-वटसैप पर , पुलिस और पत्रकार ब्लैकमेलिंग मे मस्त 

राजेश शर्मा 
उत्तराखण्ड में पिछले एक सप्ताह से सोशल मीडिया पर उधमसिंह नगर के काशीपुर में एक संस्थान में काम करने वाली एक युवती के साथ कथित रूप से उद्यमी व उसके रिश्तेदार द्वारा किए यौन शोषण से जुड़ी कुछ वॉट्सएप चैट, फोटो व अश्लील वीडियो वायरल हो रखी है।
चर्चाओं का बाजार गर्म है कि जैसे ही इस यौन शोषण के कथित प्रमाण उधमसिंह नगर से लेकर राजधानी के एक दर्जन बड़े-बड़े मीडियाकर्मियों के हाथ लगे तो इस सनसनीखेज कांड का खुलासा मीडिया में न हो इसके लिए उद्यमी के एक करीबी मीडियाकर्मी ने इस पूरे कांड को मैनेज करने का जिम्मा अपने हाथ में लिया।
 चर्चाओं का बाजार गर्म है कि इस मीडियाकर्मी ने उधमसिंहनगर से लेकर राजधानी के लगभग एक दर्जन मीडियाकर्मियों को इस पूरे कांड को मैनेज करने के लिए रहस्यमय तोहफा दिलवाया?
चर्चा यहां तक है कि चंद मीडियाकर्मियों ने इस मामले में अपने आपको पाक साफ रखने के लिए ऐसा खेल खेला जिससे अगर भविष्य में इस कथित यौन शोषण की जांच हो जाए तो वह पुलिस की जांच के चक्रव्यूह से बच सके?
आरोप यहां तक लग रहे है कि पुलिस की इस मामले में रहस्यमय चुप्पी के पीछे कोई न कोई राज छुपा हुआ है? यही कारण है कि पुलिस के कुछ अफसर इस मामले की गूंज सामने आने के बाद भी उसका सच सबके सामने लाने के लिए जांच कराने को तैयार ही नहीं हो रहे?
बहस छिड़ रही है कि पुलिस को इस मामले में बड़ी जांच करने में क्या दिक्कत है?
सवाल यह खड़े हो रहे हैं कि यह चैट व फोटोग्राफ उद्यमी व युवती बीच हुई वार्तालाप से संबंधित है तो फिर आखिरकार सोशल मीडिया पर यह कैसे वायरल हो गए?
सवाल खड़ा हो रहा है कि अगर युवती ने यह सबकुछ वायरल किया है तो उसका उद्देश्य उद्यमी व उसके रिश्तेदार को जेल की सलाखों के पीछे पंहुचाने का था या इसकी आड़ में वह उद्यमी के साथ ब्लैकमेलिंग का एक बड़ा खेल खेलने में सफल हो गई?
हाईप्रोफाइल माने जा रहे इस कथित यौन शोषण का सच बाहर लाने के लिए पुलिस के आला अफसरों को पहल करनी होगी, जिससे अगर इस कांड में मीडिया, पुलिस या किसी ने भी ब्लैकमेलिंग का खेल पर्दे के पीछे रहकर खेला है तो उन्हें सलाखों के पीछे पंहुचाने का जिम्मा पुलिस मुख्यालय के उन बड़े अफसरों पर भी है जो यह संदेश देते आ रहे हैं कि कानून सबके लिए एक है और जो भी इसे तोड़ेगा वह सलाखों के पीछे जाएगा।
अब देखने वाली बात है कि मीडिया में ऐसे संदेश देने वाले चंद अफसर क्या इस हाईप्रोफाइल हो चुके कांड की जांच के लिए मुख्यालय से ही एसआईटी का गठन करने के लिए आगे आने का साहस दिखाएंगे?

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