यहां जंगलों में सड़ रहा करोड़ों का स्लीपर: फाइलों में अटका सिस्टम, खुले आसमान के नीचे गल रही सरकारी संपत्ति

पुरोला/उत्तरकाशी, 1 मई 2026 रिपोर्ट -नीरज उत्तराखंडी उत्तरकाशी जिले के पुरोला स्थित टौस लॉगिंग प्रभाग में करोड़ों रुपये मूल्य की लकड़ी से तैयार स्लीपर (प्रकाष्ठ) पिछले तीन वर्षों से खुले आसमान के नीचे पड़े-पड़े खराब हो रहे हैं। बारिश, धूप और उपेक्षा के बीच धीरे-धीरे सड़ती यह लकड़ी केवल वन संपदा के नुकसान की कहानी […]

पुरोला/उत्तरकाशी, 1 मई 2026

रिपोर्ट -नीरज उत्तराखंडी
उत्तरकाशी जिले के पुरोला स्थित टौस लॉगिंग प्रभाग में करोड़ों रुपये मूल्य की लकड़ी से तैयार स्लीपर (प्रकाष्ठ) पिछले तीन वर्षों से खुले आसमान के नीचे पड़े-पड़े खराब हो रहे हैं।

बारिश, धूप और उपेक्षा के बीच धीरे-धीरे सड़ती यह लकड़ी केवल वन संपदा के नुकसान की कहानी नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की सुस्ती, विभागीय तालमेल की कमी और जवाबदेही के अभाव की गंभीर तस्वीर भी पेश कर रही है।

सूत्रों के अनुसार वर्ष 2022 और 2023 में विभिन्न क्षेत्रों में पेड़ों के अवैध पातन से जुड़े मामलों का निस्तारण समय पर नहीं हो पाया। वन विभाग और वन विकास निगम के बीच समन्वय की कमी के चलते लकड़ी के उपयोग, संरक्षण और निस्तारण की प्रक्रिया फाइलों में उलझ गई। परिणामस्वरूप हजारों घनमीटर लकड़ी से तैयार स्लीपर वर्षों से खुले में पड़े हैं।

करोड़ों की संपत्ति पर मौसम की मार

जानकारी के अनुसार देवदार और फर जैसी बहुमूल्य प्रजातियों की लकड़ी को काटने, चिरान, दुलाई और प्रसंस्करण में करोड़ों रुपये खर्च किए गए। लकड़ी पर रॉयल्टी का भुगतान भी हुआ। इसके बावजूद तैयार स्लीपर सुरक्षित डिपो तक नहीं पहुंच सके।

अब स्थिति यह है कि खुले मैदानों में रखे स्लीपर बारिश में भीग रहे हैं, धूप में फट रहे हैं और धीरे-धीरे उनकी गुणवत्ता घटती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक खुले वातावरण में रहने से लकड़ी की मजबूती और बाजार मूल्य दोनों प्रभावित होते हैं।

फाइलों में अटका फैसला, जमीन पर बढ़ता नुकसान

स्थानीय सूत्र बताते हैं कि अवैध पातन से जुड़े मामलों की जांच उच्च स्तर पर चल रही है, लेकिन उसकी गति बेहद धीमी है। तीन वर्षों में जांच और प्रशासनिक निर्णय स्पष्ट नहीं हो सके। ऐसे में न तो लकड़ी का अंतिम निस्तारण हुआ और न ही जिम्मेदारी तय की जा सकी।

एक अधिकारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि मामला अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि विभागीय प्रतिष्ठा से जुड़ गया है। अधिकारी किसी स्तर पर निर्णय लेने से बच रहे हैं, जिससे नुकसान लगातार बढ़ रहा है।

ठेकेदार और मजदूरों का भुगतान भी अटका

इस मामले का सबसे बड़ा असर उन ठेकेदारों और श्रमिकों पर पड़ा है, जिन्होंने लकड़ी कटान और स्लीपर निर्माण का कार्य किया। बताया जा रहा है कि तीन वर्षों से कई लोगों का भुगतान लंबित है।

स्थानीय ठेकेदारों में नाराजगी है। उनका कहना है कि जब कार्य पूरा हो चुका है और लकड़ी तैयार है, तो भुगतान रोकने का आधार क्या है। कई श्रमिक आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार हाल ही में ठेकेदारों और श्रमिकों ने वन मंत्री से एक कार्यक्रम के दौरान मुलाकात कर समस्या उठाई। उन्हें शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया गया, लेकिन जमीन पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दी।

रिटायर कर्मचारियों की पेंशन पर भी असर

मामले की एक और गंभीर परत सामने आई है। जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती उस दौरान थी, उनमें से कई अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। लेकिन प्रकरण लंबित होने के कारण कुछ मामलों में पेंशन और विभागीय औपचारिकताएं भी प्रभावित बताई जा रही हैं।

जिम्मेदारी तय न होने और फाइल बंद न होने से पुराने कर्मचारी भी प्रशासनिक प्रक्रिया में उलझे हुए हैं।

सवालों के घेरे में विभागीय जवाबदेही

जब इस संबंध में संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो संपर्क नहीं हो सका। स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते स्लीपर सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट नहीं किए गए और जांच प्रक्रिया पूरी नहीं हुई, तो आने वाले मानसून में नुकसान और बढ़ सकता है।

बड़ा सवाल: नुकसान पहले, जिम्मेदारी बाद में?

पुरोला के जंगलों में पड़ा यह स्लीपर केवल लकड़ी का ढेर नहीं, बल्कि एक ऐसा सवाल है जो सरकारी व्यवस्था पर खड़ा होता दिखाई देता है—क्या सरकारी सिस्टम में नुकसान पहले होता है और जवाबदेही बाद में तय होती है?

जंगल ने अपना काम किया, पेड़ उगे। मजदूरों ने अपना काम किया, लकड़ी तैयार हुई। लेकिन अब सिस्टम की बारी है। सवाल यही है कि क्या सिस्टम अब भी सो रहा है?

Also Read This

एक्शन: घूस लेते संग्रह अमीन और वरिष्ठ सहायक को विजलेंस ने रंगे हाथ दबोचा 

हल्द्वानी/ऊधमसिंह नगर, 29 जुलाई। उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) का अभियान लगातार जारी है। इसी क्रम में हल्द्वानी विजिलेंस की ट्रैप...

बड़ी खबर: आय से अधिक सम्पति मामले में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी को विजलेंस कोर्ट का नोटिस

देहरादून,  जुलाई 2026। उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी को देहरादून स्थित विशेष न्यायाधीश (सतर्कता अधिष्ठान), गढ़वाल परिक्षेत्र एवं पंचम अपर जिला एवं...
Parvatjan Team
Parvatjan Team
Parvatjan Team is dedicated to delivering the latest, accurate, and reliable news from Uttarakhand. We cover local issues, administrative updates, public interest stories, and breaking news in a clear and simple manner.

Related Posts