प्रवक्ता को निदेशक से जान का खतरा। राष्ट्रपति तक से सुरक्षा की मांग

 टीएचडीसी हाइड्रो कॉलेज के प्रवक्ता डॉ अरविंद कुमार सिंह ने अपनी सुरक्षा के लिए पत्र लिखकर Chairman UGC/AICTE, MHRD, माननीय मुख्यमंत्री जी, महामहिम राज्यपाल, प्रधानमंत्री जी व महामहिम राष्ट्रपति से स्वयं की सुरक्षा की मांग की है। वह दो साल यह मांग कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप में लिखा था कि संस्थान के निदेशक से मुझे जान का खतरा है। जिसपर संज्ञान लेते हुए विश्वविद्यालय की कुलसचिव ने मेरे नाम से पत्र लिखकर संबद्ध अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा। डाक्टर कुमार कहते हैं,-” मैंने टिहरी गढ़वाल प्रशाशन को लिखित रूप में बार बार सूचना भी दे रखी है। पर मुझे आजतक कोई सुरक्षात्मक व्यवस्था नहीं दी गयी। व आजतक मेरा सभी समान पुस्तकें, थीसिस, शोध पत्र व सभी एकेडमिक रिकॉर्ड्स तथा मेरे बैंक से संबद्ध डॉक्युमेंट्स  केबिन में ही लॉक कर रखा है। बार बार के आग्रह के वाबजूद भी मुझे मेरे सामान वापस नहीं मिले हैं।”
निदेशक गीतम सिंह तोमर को मुख्यमंत्री के अनुमोदन के बाद उत्तराखंड शासन ने कार्यमुक्त कर दिया था। निदेशक तोमर की अयोग्यता (AMIE की डिग्री के बाद पार्ट टाइम M Tech vo bhi AICTE se non approved) की वजह से आज की तिथि में उत्तर भारत के लगभग सभी राज्यों ने नौकरी देने से मना कर रखा है।
डाक्टर कुमार का आरोप है कि,-“तोमर नौकरी न मिलने के कारण अब भी देहरादून में है और भयंकर खुराफात में लगे है।
उत्तराखंड तकनीकी शिक्षा में सक्रिय ऐसे लोगों की वजह से मुझे जान का खतरा बना हुआ है। उसका साथ लगभग सभी अयोग्य निदेशक और कुछ नौकरशाह व उनकी बीवियां दे रही हैं।”
 C M D THDCIL ने कुमार के बार बार के अनुरोध पर माननीय मुख्यमंत्री जी को संबोधित एक पत्र संस्थान के संदर्भ में भेजा है।
डाक्टर कुमार कहते हैं, ” मैं लगातार चौदह बार फैकल्टी एसोसिएशन प्रेसिडेंट के रूप में और व्यक्तिगत रूप में माननीय उच्चन्यायालय व सर्वोच्च न्यायालय से जीत चुका हूं। मैं स्थाई रूप से टिहरी हाइड्रो पावर संस्थान (THDCIHET) में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हूं व जिस् तरीके से लगातार मुझे तीसरी बार गैरकानूनी ढंग से बर्खास्त किया गया है मुझे अब अपनी जान का खतरा भी स्पष्ट रूप से प्रतीत होने लगा है। गैरकानूनी ढंग से बर्खास्तगी पर माननीय मुख्यन्यायाधीश उत्तराखंड उच्च न्यायालय की बेंच ने मेरे अपील पर बहुत ही कड़ा रुख अपनाया है साथ ही साथ माननीय मुख्य न्यायाधीश ने कड़े एक्शन की बात की है।” वर्तमान में प्रभारी निदेशक के के एस मेर की भूमिका बेहद संदिग्ध है जो कि पिछले चार माह में सिर्फ पांच दिन ही संस्थान में आए हैं जिसमें चार दिन झगडा कर लिए हैं और पिछले ढाई माह से संस्थान में आए ही नहीं है अंतिम बार स्टाफ से झगडा करने के बाद। फिर भी कुमार को सेवा से बर्खास्त करने का प्रस्ताव TEQIP-III B O G में इन्हीं का था।
अतः उपर्युक्त परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए डाक्टर अरविंद कुमार ने एक बार फिर अपने लिए सुरक्षा की मांग की है।

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