देहरादून। नीरज उत्तराखंडी
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने वरिष्ठ IPS अधिकारियों के प्रतिनियुक्ति विवाद मामले में राज्य सरकार को बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट ने मामले को सेवा संबंधी विवाद मानते हुए स्पष्ट किया कि इसकी सुनवाई के लिए केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) ही उपयुक्त मंच है। अदालत ने याचिकाकर्ता अधिकारियों को CAT जाने के निर्देश दिए और मामले में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
इसके साथ ही अदालत ने इस प्रकरण से जुड़ी अवमानना याचिका भी खारिज कर दी है। हाईकोर्ट के इस फैसले को राज्य सरकार के लिए अहम कानूनी सफलता माना जा रहा है।
प्रतिनियुक्ति आदेशों को दी थी चुनौती
मामला केंद्र सरकार द्वारा जारी प्रतिनियुक्ति आदेशों से जुड़ा है। इन आदेशों के तहत वरिष्ठ IPS अधिकारी नीरू गर्ग और अरुण मोहन जोशी को DIG पद पर प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाने के निर्देश जारी किए गए थे।
दोनों अधिकारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध प्रतिनियुक्ति पर भेजा जा रहा है। अधिकारियों का कहना था कि जिन पदों पर उनकी तैनाती की जा रही है, वे उनके वर्तमान रैंक और वरिष्ठता के अनुरूप नहीं हैं।
सरकार की दलील से सहमत हुआ कोर्ट
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि यह पूरी तरह सेवा विवाद का मामला है और ऐसे मामलों की सुनवाई केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) के अधिकार क्षेत्र में आती है। सरकार ने तर्क दिया कि हाईकोर्ट में सीधे हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
अदालत ने राज्य सरकार की दलीलों को स्वीकार करते हुए अधिकारियों को CAT का रुख करने की सलाह दी।
फैसले के बाद प्रशासनिक गलियारों में चर्चा तेज
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट का यह फैसला राज्य सरकार की मजबूत कानूनी तैयारी को दर्शाता है। वहीं अब इस मामले की अगली बड़ी सुनवाई CAT में होने की संभावना है, जहां प्रतिनियुक्ति आदेशों की वैधता, सेवा शर्तों और अधिकारियों की आपत्तियों पर विस्तार से बहस होगी।
फिलहाल हाईकोर्ट के फैसले के बाद राज्य सरकार ने राहत की सांस ली है, जबकि दोनों IPS अधिकारियों के सामने अब CAT में अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखने की चुनौती होगी।




