(रिपोर्ट-गिरीश चंदोला/चमोली)
थराली के पिंडर घाटी क्षेत्र पहने वाली गंगा की सहायक पिंडर नदी इन दिनों दूषित ( मठमेला) नजर आ रही है। हैरानी की बात यह है कि पिछले दो सप्ताह से अधिक का समय बीत जाने के बावजूद वन विभाग और जिला प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कोई ठोस कार्रवाई करता नहीं दिख रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, यमुना प्रसाद उनियाल , कमलेश चंद्र , अनिल जोशी , नरेश चंद्र , रमेश चन्द्र आदि लोगो का कहना है कि नदी का पानी लगातार गंदा होता जा रहा है, जिससे जल में रहने वाले जलीय जीवों की मौत तक हो रही है।
बावजूद इसके अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आखिर नदी को प्रदूषित करने का स्रोत क्या है—किसी अवैध गतिविधि, कचरा निस्तारण या अन्य कारणों से यह स्थिति उत्पन्न हो रही है।
भीषण गर्मी के बीच क्षेत्रीय ग्रामीण इसी नदी के पानी का उपयोग पीने और दैनिक कार्यों के लिए कर रहे हैं। ऐसे में दूषित पानी सीधे तौर पर मानव स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बन चुका है।
जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है, लेकिन संबंधित विभागों की ओर से न तो जांच की गई है और न ही कोई चेतावनी जारी की गई है।
पिंडर नदी का धार्मिक और सामाजिक महत्व भी बेहद बड़ा है। यहां के लोग धार्मिक अनुष्ठानों, पिंडदान और अन्य कार्यों में इसी पवित्र जल का उपयोग करते हैं।
साथ ही, नदी किनारे बिछी कई पेयजल पाइपलाइन योजनाएं भी इसी जल स्रोत पर निर्भर हैं। ऐसे में नदी का दूषित होना पर्यावरण, आस्था और जनजीवन—तीनों के लिए गंभीर संकट बन गया है।
चौंकाने वाली बात यह भी है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए समय-समय पर आवाज उठाने वाले सामाजिक संगठन और पर्यावरण प्रेमी भी इस मुद्दे पर खामोश नजर आ रहे हैं।
अब बड़ा सवाल यही है—
क्या प्रशासन समय रहते इस समस्या की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करेगा?या फिर पवित्र पिंडर नदी यूं ही प्रदूषण की चपेट में आती रहेगी और जलीय जीवों के साथ-साथ इंसानी जीवन भी खतरे में पड़ता रहेगा ।
वही उपजिलाधिकारी थराली पंकज भट्ट ने कहा, पिंडर नदी का पानी किस कारण दूषित हो रहा है इस संबंध में तत्काल वन विभाग को निर्देशित किया जाएगा की पानी किस कारण दूषित हो रहा है उसकी जानकारी तत्काल दें,अगर कोई ऐसी निर्माण दाई संस्थागत नदी को दूषित कर रही है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।




