देहरादून। उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित एकमात्र यूनानी मेडिकल कॉलेज पर बड़ी कार्रवाई की गई है। भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (NCISM) ने उत्तरांचल यूनानी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए संस्थान की मान्यता रद्द कर दी है।
साथ ही कॉलेज पर एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस कार्रवाई के चलते बीयूएमएस (BUMS) पाठ्यक्रम की 60 सीटों पर नए सत्र में दाखिले पर रोक लग गई है।
कॉलेज में 20 ऐसे शिक्षकों के नाम दर्ज होने, जो कथित तौर पर वहां पढ़ाते नहीं थे, और जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज में कथित छेड़छाड़ किए जाने का मामला सामने आया है। आयोग की कार्रवाई से यूनानी चिकित्सा की पढ़ाई करने की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के सामने अनिश्चितता पैदा हो गई है।
20 शिक्षकों के नाम पर कथित गड़बड़ी, जांच में खुलासा
मामला हरिद्वार के पदार्था स्थित उत्तरांचल यूनानी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल का है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जून में मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड की विशेष टीम ने संस्थान का औचक निरीक्षण किया था। इस दौरान कॉलेज में दर्ज 20 प्रोफेसरों और शिक्षकों की वास्तविक उपस्थिति को लेकर गंभीर सवाल सामने आए।
आरोप है कि इन शिक्षकों के नाम कॉलेज के रिकॉर्ड में दर्ज थे, जबकि वे वास्तव में संस्थान में पढ़ाने नहीं आते थे। इसके अलावा शिक्षकों की आधार-लिंक्ड बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली में भी कथित अनियमितताएं पाई गईं।
सीसीटीवी फुटेज में छेड़छाड़ का भी आरोप
निरीक्षण के दौरान जांच टीम ने शिक्षकों की उपस्थिति से संबंधित प्रमाण मांगे। आरोप है कि कॉलेज प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराए गए सीसीटीवी वीडियो एडिट किए गए थे और उनमें लूपिंग का इस्तेमाल किया गया था।
इन कथित अनियमितताओं को गंभीर मानते हुए आयोग ने संस्थान के खिलाफ कार्रवाई की। हालांकि, मामले से जुड़े सभी आरोपों और जांच के निष्कर्षों की विस्तृत आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
₹1 करोड़ का जुर्माना, BUMS की सभी 60 सीटों पर रोक
आयोग की कार्रवाई के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कॉलेज की मान्यता रद्द किए जाने और एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। साथ ही बीयूएमएस पाठ्यक्रम की सभी 60 सीटों पर नए सत्र में दाखिले की प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई है।
इस फैसले का सीधा असर उन विद्यार्थियों पर पड़ सकता है, जो उत्तराखंड में यूनानी चिकित्सा की पढ़ाई के लिए इस संस्थान में प्रवेश लेने की तैयारी कर रहे थे।
आयुष और यूनानी चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल
इस कार्रवाई ने राज्य में आयुष और यूनानी चिकित्सा शिक्षा संस्थानों में शैक्षणिक मानकों तथा शिक्षकों की वास्तविक उपलब्धता को लेकर सवाल खड़े किए हैं। चिकित्सा शिक्षा में निर्धारित मानकों का पालन और योग्य शिक्षकों की उपलब्धता विद्यार्थियों के प्रशिक्षण के लिए महत्वपूर्ण है।






