त्यूणी, देहरादून।3 सितंबर 2026, नीरज उत्तराखंडी
#सीमांत क्षेत्र के बाजारों में बेहद कम कीमत पर पहुंच रही मिठाइयों का कारोबार अब सवालों के घेरे में है। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार हिमाचल प्रदेश के सोलन क्षेत्र से वाहन लेकर आने वाले व्यापारी स्थानीय मिठाई विक्रेताओं को कथित तौर पर 100 से 150 रुपये प्रति किलो के थोक भाव में बर्फी जैसी मिठाइयां उपलब्ध कराते हैं। इसके बाद यही मिठाई स्थानीय दुकानों पर 200 से 400 रुपये प्रति किलो तक की दर से बेचे जाने की बात सामने आ रही है।
#सूत्रों का कहना है कि सस्ती मिठाई बेचने वाले वाहन लगभग हर 15 दिन में क्षेत्र के बाजारों में पहुंचते हैं। कम कीमत के कारण स्थानीय दुकानदारों के लिए यह कारोबार आकर्षक बना हुआ है, वहीं उपभोक्ता भी अपेक्षाकृत सस्ता उत्पाद समझकर इसे खरीद लेते हैं।
#लेकिन इस पूरे कारोबार में सबसे बड़ा सवाल मिठाई की गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा मानकों को लेकर है।
इतनी सस्ती मिठाई आखिर बनती कैसे है?
#स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब दूध, खोया, चीनी, घी और अन्य खाद्य सामग्री की कीमतें सामान्य स्तर पर हैं, तो आखिर 100-150 रुपये किलो के थोक मूल्य पर तैयार मिठाई किस लागत में बनाई जा रही है?
#क्या इसमें दूध और खोये का पर्याप्त इस्तेमाल किया जा रहा है? निर्माण कहां हो रहा है? मिठाई कितनी पुरानी है? इसमें कौन-कौन सी सामग्री इस्तेमाल की गई है? परिवहन और भंडारण किस तरह किया जाता है?
इन सवालों का जवाब बिना नमूने लिए और प्रयोगशाला जांच कराए नहीं मिल सकता।
बिना ब्रांड और पहचान की मिठाई पर भी सवाल
सूत्रों के मुताबिक बाहर से आने वाली इन मिठाइयों में कई उत्पाद बिना स्पष्ट ब्रांड, निर्माता की जानकारी और अन्य जरूरी विवरण के खुले अथवा सामान्य पैकिंग में दुकानों तक पहुंचते हैं। ऐसे में उपभोक्ता के लिए यह जानना मुश्किल हो जाता है कि मिठाई कहां बनी, कब बनी और इसकी गुणवत्ता के लिए जिम्मेदार कौन है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि उत्पाद खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप है तो जांच से इसकी पुष्टि होनी चाहिए। यदि मानकों का उल्लंघन हो रहा है तो कार्रवाई भी जरूरी है।
हर 15 दिन में वाहन पहुंचने का दावा, फिर भी जांच क्यों नहीं?
विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि करीब हर 15 दिन में वाहन लेकर सस्ती मिठाइयां बेचने वाले व्यापारी बाजार क्षेत्र में आते हैं। यदि यह जानकारी सही है तो सवाल यह उठता है कि नियमित रूप से बाहरी क्षेत्र से खाद्य सामग्री लेकर आने वाले इन वाहनों और इनके जरिए हो रही मिठाइयों की बिक्री की खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा कभी सैंपलिंग की गई या नहीं?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार अफसर इस मामले की जांच की जहमत नहीं उठाते। हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन नियमित रूप से बाहर से आने वाली खाद्य सामग्री की शिकायतों के बीच विभागीय निरीक्षण और सैंपलिंग की मांग जरूर गंभीरता से ली जानी चाहिए।
200 से 400 रुपये किलो में बिकती है वही मिठाई
सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि कथित तौर पर 100 से 150 रुपये किलो के थोक भाव में दुकानदारों को मिलने वाली मिठाई को बाजार में 200 से 400 रुपये किलो तक बेचे जाने की बात कही जा रही है।
यानी कम कीमत पर खरीद और अपेक्षाकृत ऊंची कीमत पर बिक्री से दुकानदारों को अच्छा मार्जिन मिल रहा है। ऐसे में उपभोक्ता के सामने केवल कीमत का सवाल नहीं, बल्कि गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा का सवाल भी खड़ा होता है।
त्योहारों से पहले जांच जरूरी
मिठाइयों की मांग त्योहारों के दौरान बढ़ जाती है। ऐसे में बाहर से आने वाली सस्ती मिठाइयों की बिक्री भी बढ़ने की संभावना रहती है। यदि किसी खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता संदिग्ध है तो उसका असर बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।
इसलिए खाद्य सुरक्षा विभाग को त्यूणी सहित आसपास के बाजारों में अचानक निरीक्षण और सैंपलिंग अभियान चलाना चाहिए। साथ ही बाहर से मिठाई लेकर आने वाले वाहनों, उनके कारोबारियों, निर्माण स्थल, भंडारण व्यवस्था और दुकानों तक पहुंचने वाली पूरी सप्लाई चेन की भी जांच होनी चाहिए।
उपभोक्ता के स्वास्थ्य से बड़ा नहीं हो सकता मुनाफा
स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी भी व्यापारी को कारोबार करने का अधिकार है, लेकिन खाद्य पदार्थों के मामले में उपभोक्ता की सेहत सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
यदि मिठाई गुणवत्ता मानकों पर खरी उतरती है तो जांच के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। लेकिन यदि उसमें मिलावट, खराब गुणवत्ता या खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
फिलहाल बाजार में सवाल यही है—हर 15 दिन में वाहन लेकर आने वाली 100-150 रुपये किलो की मिठाई आखिर इतनी सस्ती क्यों है और इसकी जांच करने की जिम्मेदारी किसकी है?
जब तक नमूने लेकर प्रयोगशाला जांच नहीं होती, तब तक सवाल बने रहेंगे और उपभोक्ता की सेहत के साथ कथित खिलवाड़ का खतरा भी।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
वहीं वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी संजय तिवारी ने कहा कि पर्याप्त संसाधन एवं कर्मचारियों की कमी तथा क्षेत्र के दूरस्थ और सीमांत होने के कारण नियमित निरीक्षण में व्यावहारिक कठिनाइयां आती हैं। मामला संज्ञान में आया है। शीघ्र ही संबंधित क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण कर खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता एवं आपूर्ति व्यवस्था की जांच की जाएगी। जांच में नकली मिठाई, पनीर अथवा अन्य खाद्य पदार्थों की अवैध आपूर्ति की पुष्टि होने पर संबंधित कारोबारियों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।


