वीडियो : बेरोजगार युवा क्यों बजा रहे ताली और थाली। जानिए विस्तार से

रिपोर्ट- जगदम्बा कोठारी

राज्य मे बढ़ती बेरोजगारी के कारण जहां युवा सरकार को जगाने के लिए ताली ताली पीटने से लेकर रोजगार के अभाव में आत्महत्या तक करने पर मजबूर हैं तो वहीं दूसरी ओर सरकार की तरफ से अधीनस्थ चयन आयोग को हजारों पदों पर भर्ती परीक्षा करवाने के लिए अभियाचन सालों पहले से प्राप्त हो चुका है मगर भर्ती परीक्षा नहीं आयोजित हो सकी।

आरटीआई कार्यकर्ता रामेश्वर कंडवाल को आरटीआई से मिली सूचना से एक बड़ा खुलासा हुआ है, जिसमें पता चला है कि प्रदेश में हजारों रिक्त पड़े पदों पर आयोग को सरकार की तरफ से भर्ती करवाने का अभियाचन मिल चुका है तो दूसरी तरफ आयोग इन पर भर्ती परीक्षा आयोजित नहीं करवा रहा है। जिसका खामियाजा प्रदेश के बेरोजगारों को भुगतना पड़ रहा है।

वीडियो

https://youtu.be/22WjyQBKRyU

 

प्रदेश में हजारों पदों पर संबंधित विभागों ने प्रदेश सरकार के माध्यम से उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से अधियाचनायें मांगी है।

आरटीआई कार्यकर्ता रामेश्वर कंडवाल को सूचना अधिकार अधिनियम के तहत मिली सूचना में इस बात का पता चला है। प्रदेश में एलटी शिक्षकों, बंदी रक्षक, पटवारी, लेखाकार समेत दर्जनों विभागों में हजारों पद रिक्त पड़े हैं। और इन पदों पर संबंधित विभाग द्वारा राज्य चयन आयोग से अधियाचनांये मांगकर विभाग को पद उपलब्ध कराने की मांग भी की है मगर आयोग द्वारा इन पदों पर परीक्षाएं नहीं करवाई जा रही हैं।
राज्य अधीनस्थ चयन आयोग (uksssc) के पास लंबे समय से हजारों रिक्त पदों पर संबंधित विभागों के अधियाचन लम्बित पड़े हैं। जिस कारण भर्ती की तैयारी कर रहे हैं हजारों युवा अब ओवरेज हो रहे हैं।

एलटी में बंपर 1419 रिक्त पदों पर परीक्षा के लिए अधियाचन
सूचना अधिकार अधिनियम के तहत मिली सूचना से शिक्षा विभाग में बंपर भर्ती लंबित पड़ी होने का खुलासा हुआ है। पिछले माह अगस्त में कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने घोषणा कर कहा था कि 1 सप्ताह के भीतर और 15 अगस्त से पहले एलटी (सहायक अध्यापक) के लिए 1000 पदों पर विज्ञप्ति जारी की जाएगी मगर अब एक माह होने को है अभी तक इन पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। वहीं आरटीआई से मिले जवाब मे पता चला है कि कुमाऊं मंडल में 747 और गढ़वाल मंडल में 672 सहायक अध्यापकों की भर्ती शुरू करवाने के लिए उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग सरकार से अधियाचन मिला है। मगर अब क्या कारण है कि आयोग द्वारा इन पदों पर भर्ती शुरू नहीं की गई है।

वीडियो और वीपीडियो के सैंकड़ों रिक्त पद

आरटीआई से मिली जानकारी से पता चला है कि वर्षों से लंबित पड़ी वीडियो एवं वीपीडियो के सैकड़ों पदों पर उत्तराखंड अधीनस्थ चयन आयोग भर्ती शुरू नहीं करवा सका है। आयोग को जहां ग्राम विकास अधिकारी के 225 पद एवं ग्राम पंचायत विकास अधिकारी के 380 पदों पर भर्ती के लिए सरकार की ओर से अधियाचन प्राप्त हुआ है। लेकिन इन पदों पर भी भर्ती नहीं निकाली गई।
पटवारी और बंदी रक्षक पदों पर भी परिक्षा नहीं हुई
उत्तराखंड अधीनस्थ चयन आयोग (Uksss) को पटवारी और बंदी रक्षक के 654पदों पर परिक्षा कराने के लिए अधियाचन प्राप्त हुआ है। इनमें 450 पद पटवारी के लिए और 204 पद बंदी रक्षक पद के लिए हैं। बंदी रक्षक में 191 पद पुरुष के लिए एवं 13 पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। लंबे समय से प्रदेश का युवा इस भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहा है लेकिन आयोग इन परीक्षाओं को भी आयोजित नहीं करवा सका है और युवा अब उम्र दराज होते जा रहे हैं।
प्रयोगशाला सहायक के सैकड़ों पद
उच्च शिक्षा विभाग में प्रयोगशाला सहायकों के भी काफी पदों पर भर्ती परीक्षा करवाने के लिए सरकार की ओर से अधियाचन प्राप्त हुआ है। इनमें प्रयोगशाला सहायक रसायन विज्ञान के 45, जीव विज्ञान के 38, वनस्पति विज्ञान के 39,भौतिक विज्ञान के 15, भूगोल के 17, गृह विज्ञान के 15 पदों पर परिक्षा कराने का आदेश प्राप्त हुआ है। लेकिन भर्ती परीक्षा नहीं हुई।

कृषि विभाग में 280 पद

कृषि विभाग में सहायक कृषि अधिकारी वर्ग ‘3’ में 280 पदों के लिए अधियाचन प्राप्त हो चुका है। लेकिन उत्तराखंड अधीनस्थ चयन आयोग इन पदों पर भी परीक्षा आयोजित नहीं करवा सका और प्रदेश के लाखों शिक्षित बेरोजगार घर बैठे हैं।
अन्य विभागों में सैकड़ों पद
विभिन्न विभागों में ड्राइवर के 197,हाईस्कूल स्तरीय तकनीकी प्रक्रति के 116, पीडब्ल्यूडी में अवर अभियंता, मत्स्य पालन विभाग में, लघु सिंचाई, परिवहन विभाग, समाज कल्याण समेत, यहां तक कि सचिवालय प्रशासन में रक्षक के 28 पदों के लिए भी उत्तराखंड अधीनस्थ चयन आयोग को सरकार की ओर से भर्ती करवाने के लिए अभियाचन प्राप्त हो गया है पर हैरत की बात है कि प्रदेश में हजारों पदों में से किसी पर भी आयोग भर्ती परीक्षा नहीं करवा रहा है। यह प्रदेश सरकार की रोजगार नीति पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाता है।
बड़ा प्रश्न
अब बड़ा प्रश्न उठता है कि प्रदेश में हजारों पद रिक्त पड़े हैं और इन पर भर्ती परीक्षा करवाने के लिए आयोग को अभियाचन भी प्राप्त हो गया है। मगर ऐसी क्या वजह है कि आयोग इन परीक्षाओं को संपन्न में नहीं करवा रहा है। जबकि रोजगार के अभाव में आए दिन प्रदेश में शिक्षित बेरोजगार आत्महत्या कर रहे हैं। और सरकार है कि संसाधन होने के बावजूद भी तमाशबीन बनी है। क्या प्रदेश के मुखिया त्रिवेंद्र रावत ने यह जानने की कोशिश करी है कि यह भर्ती क्यों नहीं आयोजित करवाई जा रही है या इन्हीं के इशारे पर यह भर्तियां रोकी गई हों। कहीं सरकार मंशा इन लंबी भर्तियों को चुनाव के दौरान तो नहीं निकालने की है। क्योंकि जिस तरीके से प्रदेश सरकार शिक्षित बेरोजगारों के निशाने पर है उससे तो सरकार में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए चिंतित होना जायज भी है। जानकारों का मानना है कि संभवत: सरकार की इन भर्तियों को चुनाव के दौरान खोलने की मंशा है।

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