अंधेर: मायादेवी विश्वविद्यालय ने बिना मान्यता किए बीएससी नर्सिंग में दाखिले! अधर में लटका 60 छात्राओं का भविष्य 

देहरादून। सेलाकुई स्थित मायादेवी विश्वविद्यालय ने बीएससी नर्सिंग कोर्स में बिना मान्यता के ही 60 छात्राओं को दाखिले दे दिए। विश्वविद्यालय की इस गंभीर लापरवाही के चलते 60 छात्राओं का भविष्य संकट में पड़ गया है। जैसे ही ये गंभीर मामला प्रशासन के संज्ञान में आया चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने जांच समिति गठित कर दी है […]

देहरादून। सेलाकुई स्थित मायादेवी विश्वविद्यालय ने बीएससी नर्सिंग कोर्स में बिना मान्यता के ही 60 छात्राओं को दाखिले दे दिए। विश्वविद्यालय की इस गंभीर लापरवाही के चलते 60 छात्राओं का भविष्य संकट में पड़ गया है।

जैसे ही ये गंभीर मामला प्रशासन के संज्ञान में आया चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने जांच समिति गठित कर दी है और छात्राओं के हितों की सुरक्षा के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर भी विचार शुरू कर दिया गया है।

मान्यता से पहले ही शुरू कर दिए गए दाखिले

जानकारी के अनुसार,मायादेवी विश्वविद्यालय ने बीएससी नर्सिंग और जीएनएम (GNM) कोर्स की मान्यता के लिए आवेदन किया था। निरीक्षण के दौरान जीएनएम कोर्स को मान्यता मिल गई, लेकिन बीएससी नर्सिंग के लिए अस्पताल, क्लीनिकल ट्रेनिंग सुविधाओं और अन्य आवश्यक आधारभूत ढांचे में कमियां पाए जाने के कारण मान्यता नहीं मिल सकी।

इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने बीएससी नर्सिंग कोर्स में वर्ष 2025-26 के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी और करीब 60 छात्राओं का दाखिला भी ले लिया।

शासन स्तर पर अटकी मान्यता, बढ़ी छात्राओं की चिंता

सूत्रों के मुताबिक, विश्वविद्यालय को यह आश्वासन मिला था कि निर्धारित मानक पूरे होने के बाद बीएससी नर्सिंग को मान्यता प्रदान कर दी जाएगी। लेकिन इस बीच उत्तराखंड सरकार के मंत्री मंडल में फेरबदल और फाइलों के लंबित होने के कारण मान्यता प्रक्रिया अटक गई।

नतीजतन, बीएससी नर्सिंग में दाखिला लेने वाली छात्राओं का भविष्य अनिश्चितता में फंस गया है। छात्राओं और अभिभावकों का आरोप है कि उन्हें मान्यता को लेकर पूरी जानकारी नहीं दी गई और प्रवेश प्रक्रिया भ्रामक परिस्थितियों में संचालित की गई।

छात्राएं लगा रहीं विभाग और विश्वविद्यालय के चक्कर

मान्यता संकट के कारण छात्राएं मानसिक तनाव से गुजर रही हैं। वे लगातार विश्वविद्यालय और चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर समाधान की मांग कर रही हैं, लेकिन फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है।

अभिभावकों का कहना है कि उन्होंने बच्चों की पढ़ाई पर लाखों रुपये खर्च किए हैं और अब उनके भविष्य को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है।

चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने बनाई जांच समिति

मामले की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने जांच समिति गठित कर दी है। समिति विश्वविद्यालय का स्थलीय निरीक्षण कर सभी तथ्यों की जांच करेगी और छात्राओं के हितों की सुरक्षा के लिए आवश्यक सुझाव देगी।

जल्द मिलेगी मान्यता: विश्वविद्यालय प्रशासन

मायादेवी विश्वविद्यालय के चेयरपर्सन एम.एल. जुयाल ने कहा कि बीएससी नर्सिंग कोर्स की मान्यता से संबंधित प्रस्ताव शासन स्तर पर विचाराधीन है। विश्वविद्यालय ने सभी आवश्यक मानक पूरे कर लिए हैं और अधिकारियों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है।

उन्होंने दावा किया कि मान्यता जल्द मिलने की उम्मीद है और किसी भी छात्रा के भविष्य के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।

निदेशक बोले- दोषियों पर होगी कार्रवाई

चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. अजय आर्य ने कहा कि कुछ छात्राओं की शिकायतें प्राप्त होने के बाद तत्काल जांच समिति का गठन किया गया है। समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी छात्रा के शैक्षणिक हित प्रभावित न हों।

शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस पूरे मामले ने निजी विश्वविद्यालयों में व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की मान्यता प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्र संगठनों और अभिभावकों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

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