मानसिक स्वास्थ्य सिर्फ इलाज नहीं, जिम्मेदारी भी है — ललित जोशी

देहरादून। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर राज्य मानसिक स्वास्थ्य संस्थान, सेलाकुई (देहरादून) में शुक्रवार को एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

इस वर्ष का विषय रहा — “सेवाओं तक पहुंच: आपदाओं और आपात स्थितियों में मानसिक स्वास्थ्य”, जिसके तहत विशेषज्ञों, चिकित्सकों और शिक्षाविदों ने समाज में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सार्थक संवाद किया।

मानसिक स्वास्थ्य हर व्यक्ति के विकास की नींव – जस्टिस सीमा डुंकराकोटी

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव, जस्टिस सीमा डुंकराकोटी ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य किसी भी व्यक्ति के संपूर्ण विकास की नींव है।

इसे शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्व देना चाहिए। उन्होंने कहा कि आपदाओं या संकट के समय मानसिक तनाव से गुजर रहे लोगों को समझना और मदद करना समाज की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

शिक्षा संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा जरूरी – एडवोकेट ललित मोहन जोशी

इस मौके पर सीआईएमएस एंड यूआईएचएमटी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के अध्यक्ष और राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण उत्तराखंड के सदस्य, एडवोकेट ललित मोहन जोशी ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में अभी भी कई भ्रांतियां हैं, जिन्हें दूर करने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।

उन्होंने कहा —

“मानसिक स्वास्थ्य केवल चिकित्सा का नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की जिम्मेदारी है। बच्चों और किशोरों को लचीलापन विकसित करने के लिए स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है।”

ललित जोशी ने यह भी जोड़ा कि शिक्षा संस्थानों में संवाद, जागरूकता और सहानुभूति के जरिये एक संवेदनशील और सहयोगी समाज का निर्माण किया जा सकता है।

मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को जमीनी स्तर तक सशक्त करना आवश्यक – सुमित देव बर्मन

संयुक्त निदेशक, स्वास्थ्य महानिदेशालय सुमित देव बर्मन ने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार द्वारा मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए कई योजनाएं लागू की जा रही हैं।
उन्होंने बताया कि सरकार का उद्देश्य है कि हर जरूरतमंद व्यक्ति तक मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचें, ताकि कोई भी व्यक्ति उपचार या परामर्श के अभाव में पीड़ा न सहे।

मानसिक बीमारी को स्वीकारना ही इलाज की पहली सीढ़ी – डॉ. प्रताप सिंह

मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, राज्य मानसिक स्वास्थ्य संस्थान डॉ. प्रताप सिंह ने कहा कि समाज में आज भी मानसिक बीमारी को छिपाने की प्रवृत्ति है, जबकि इसे खुले रूप से स्वीकारना ही उपचार की पहली सीढ़ी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि मानसिक रोग से जूझ रहे व्यक्तियों के प्रति सहानुभूति और सहयोग का वातावरण बनाएं।

नुक्कड़ नाटक और पोस्टर प्रदर्शनी से दी जागरूकता की सीख

कार्यक्रम में मनोचिकित्सक डॉ. पवन शर्मा, एमओ प्रदीप राणा, नर्सिंग स्टाफ, प्रशिक्षु और विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी की। विद्यार्थियों ने पोस्टर प्रदर्शनी और नुक्कड़ नाटक के माध्यम से यह संदेश दिया कि —

“तनाव, अवसाद या चिंता जैसी स्थितियों में सही परामर्श और सहयोग व्यक्ति को सामान्य जीवन की ओर लौटने में मदद करता है।”

सामूहिक जिम्मेदारी है मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाना

कार्यक्रम के अंत में संस्थान के अधिकारियों ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया और यह संदेश दिया कि —

“मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना और दूसरों को प्रेरित करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।”

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