एक्सक्लूसिव : उत्तराखंडी “किक आउट” बाहरियों के लिए “रेड कार्पेट”

राज्य सरकार की अकर्मण्यता के कारण उत्तराखंड   केंद्रीय तथा राज्य स्तरीय संस्थानों के साथ-साथ विभिन्न निजी संस्थानो मे बाहर से आने वाले बेरोजगारों के लिए नौकरियां पाने का उपनिवेश बनकर रह गया है। उत्तराखंड में ऊंचे पदों पर आसीन अन्य राज्यों के अफसर दूसरे राज्यों के बेरोजगारों को पैसे तथा पहुंच के कारण उत्तराखंड के लोगों को निकालकर नौकरियां दे रहे हैं। इससे उत्तराखंड के लोगों के अवसर छीन रहे हैं लेकिन सरकार तथा जनप्रतिनिधि कुछ नहीं कर पा रहे हैं।
कई वर्षों से एम्स में कार्यरत उत्तराखंड के दर्जनों कर्मचारियों को एम्स प्रबंधन ने विभिन्न आरोप लगाकर बाहर का रास्ता दिखा दिया है तथा उनके स्थान पर दूसरे राज्यों के युवकों की नियुक्तियां की जा रही हैं।
 यह कर्मचारी आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत थे तथा कम वेतन में ही सही लेकिन हंसी खुशी अपना परिवार पाल रहे थे। नौकरी से निकाले जाने के बाद यह लोग एम्स मे 10 दिनों से धरना प्रदर्शन ने लगे हुए हैं लेकिन मुख्यमंत्री सहित तमाम सांसदों को भी कई बार फरियाद करने के बावजूद इन कर्मचारियों की सुनने को कोई राजी नहीं है।
 डेढ़ साल में यदि सरकार द्वारा दी गई नौकरियों की तुलना निकाले जा चुके कर्मचारियों से की जाए तो निष्कासित कर्मचारियों का आंकड़ा भारी पड़ेगा।
पिछले दिनों जिला कांग्रेस कमेटी परवादून के कार्यकर्ताओं ने भी एम्स पर धरनारत निष्कासित कर्मचारियों के समर्थन में धरना दिया था। तथा केंद्र सरकार और राज्य सरकार पर आरोप लगाया था कि बाहर के लोगों को पैसे लेकर नौकरियां दी जा रही हैं। परवादून के अध्यक्ष गौरव चौधरी ने चेतावनी दी कि  यदि तत्काल निष्कासित कर्मचारियों को वापस नहीं लिया गया तो एम्स प्रशासन के दोहरे रवैया के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज किया जाएगा।
 पिछले दिनों निष्कासित कर्मचारियों ने एम्स के गेट नंबर 3 पर चाय की ठेली लगाकर प्रदर्शन किया था किंतु शासन प्रशासन ने पुलिस बल की सहायता से उन्हें तत्काल हटा दिया था। आज से निष्कासित कर्मचारियों ने क्रमिक अनशन शुरू कर दिया है।

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