हेल्थ

डाक्टर,नर्स एवं अन्य कर्मचारियों से जूझ रहा कोटद्वार बेस चिकित्सालय।

कोटद्वार।(मनाेज नाैडियाल) : उत्तराखंड सरकार जिलों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए तरह-तरह के संसाधन और सुविधाएं देने की घोषणाएं कर रही हैं पर हकीकत में ये सुविधाएं रोगी तक नहीं पहुंच पा रही हैं। बेस अस्पताल खुद ही अपनी बीमारी से जूझ रहा है।
हालांकि यहां संयुक्त चिकित्सालय को बेस चिकित्सालय में बदल दिया गया है लेकिन डॉक्टरों का अभी भी टोटा है।आज भी डॉक्टरों के पद खाली हैं। मैन पावर की कमी से जूझ रहे बेस अस्पताल के मरीजों को पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
कोटद्वार में बेस चिकित्सालय है लेकिन यहां सुविधाएं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की भी नहीं हैं। एनेस्थीसिया का एक ही डॉक्टर होने से बेस अस्पताल में उनकी अनुपस्थिति में ऑपरेशन नहीं हो पाते हैं। मानक के अनुसार बेस अस्पताल में चिकित्सकाें के 40 पद स्वीकृत हैं।
जिसमें महज 17 डॉक्टर नियमित हैं। तीन चिकित्सक संविदा पर चल रहे हैं।तीन चिकित्सकों को सम्बन्ध किया गया है जबकि 17 चिकित्सकाें के पद खाली हैं। इसी प्रकार मानक के अनुसार चीफफार्मासिस्ट के चार पद होने चाहिए लेकिन केवल दो चीफ फार्मासिस्ट हैं।
छह बैड पर एक नर्स होनी चाहिए लेकिन बेस अस्पताल कोटद्वार में केवल यह दिखाने का आंकड़ा है। जबकि कम से कम 45 उपचारिका (नर्स)होना जरूरी है। किंतु अभी कार्यरत केवल 19 हैं, जबकि 26 पद रिक्त है ।जिससे सुबह को छोड़कर एक समय में एक ही स्टाफ नर्स को रहना पड़ता है जिससे मरीजों को भी काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। दो पद लैब टेक्नीशियन, एक पद लैब टेक्नीशियन ब्लड बैंक,दो पद लैब अटेंडेंट, एक पद एएनएम पीपीसी,6 पद ओटी स्टाफनर्स एक पद ऑडियोमैट्रिशियन,1 पद वार्ड आया,1 पद कहार,1 पद ओटी अटेंडेंट व एक एक पद इमरजेंसी ,ईएंटी,ओटी पर रिक्त चल रहा है ।
बारह वार्ड ब्वाय के बजाय नौ से काम चलाया जा रहा है।वहीं  चिकित्सालय के प्रशासनिक विभाग में भी दो लेखाकार के पद रिक्त चल रहे है।
कुल मिलाकर चिकित्सकों, फार्मासिस्टों और स्टाफ नर्सों की भारी कमी से रोगियों को दिक्कत हो रही है। गंभीर मरीजाें को जॉलीग्रांट देहरादून या एम्स ऋषिकेश रेफर कर दिया जाता है।मरीजाें को मामूली ऑपरेशन या उपचार के लिए बाहर जाना पड़ता है। इसी तरह चर्म रोग,कार्डियोलॉजिस्ट, पैथोलॉजिस्ट का डॉक्टर नहीं है।वहीं एक पद फिजिशियन , प्लास्टिक सर्जन गाइनोलोजिस्ट के अलावा जीडीएमओ के 4 पद रिक्त चल रहे हैं। जिससे यहां के लोगों को जन और धन का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
बेस चिकित्सालय की ध्वस्त स्वास्थ्य सेवा के चलते निजी क्लीनिक चला रहे संचालक इसका फायदा उठा रहे हैं। मरीज भारी धनराशि खर्च कर प्राइवेट चिकित्सकाें से उपचार करा रहे हैं। आए दिन प्राइवेट क्लीनिकाें में रोगियाें के अच्छी संख्या में पहुंचने से प्राइवेट चिकित्सकाें की चांदी हो रही है।
डॉ. आरएस चौहान, सीएमएस ने कहा कि कोटद्वार बेस चिकित्सालय में चिकित्सकों की कमी और सीमित संसाधनों की वजह से मजबूरी में काम चलाया जा रहा है। शासन से चिकित्सकाें के रिक्त पदों को न भरे जाने से यह समस्या है। हमारे द्वारा इसके लिए शासन से अनेक बार पत्राचार किया जा चुका है ।फिर भी हम कम चिकित्सकों व अन्य स्टाफ से ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने का प्रयास कर रहे हैं।

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