मांगों को लेकर वकीलों ने किया राष्ट्रव्यापी आंदोलन

विभिन्न मांगों को लेकर आज उत्तराखंड बार एसोसिएशन द्वारा प्रदेश में एक दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया गया। इस दौरान वकीलों द्वारा जलूस निकालकर विशाल प्रदर्शन किया गया और राज्यपाल को मांग पत्र सौंपा।
वकीलों द्वारा केंद्र सरकार से विभिन्न मुद्दों पर विगत काफी लंबे समय से मांगे की जा रही है, परंतु अभी तक केंद्र व राज्य सरकार द्वारा इन विषयों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। इस कारण पूर्ण भारतवर्ष में वकीलों द्वारा एक दिवसीय आंदोलन किया गया। जिसके अंतर्गत शहर में एकत्रित होकर सभी वकीलों द्वारा जुलूस निकाला गया। राज्यपाल के प्रतिनिधि के रूप में एडीएम देहरादून अरविंद पांडे ने वकीलों से मुलाकात की और ज्ञापन लिया। आंदोलन में बार काउंसिल देहरादून के अलावा उत्तराखंड बार काउंसिल के सदस्य और ऋषिकेश, डोईवाला, विकासनगर सहित विभिन्न जगहों से वकील एकत्रित होकर विशाल जुलूस में शामिल हुए।

वकीलों की प्रमुख मांगे
देश के सभी अधिवक्ताओ के लिए न्यायालय परिसर में (या नजदीक में ही) अधिवक्ता संघ हेतु भवन हो वकीलों के बैठने की समुचित व्यवस्था हो। पुस्तकालय ई-लाइब्रेरी, शौचालय आदि की समुचित व्यवस्था हो, मुफ्त इंटरनेट की व्यवस्था हो। वादकारियों के बैठने की समुचित व्यवस्था हो। उचित मूल्य पर खाने-पीने की चीजें वाली कैंटीन की व्यवस्था हो। इसके अलावा नये जरूरतमंद अधिवक्ताओं को 10 हजार रुपए प्रतिमाह देने की व्यवस्था 5 वर्षों तक की जाए।
देश के सभी अधिवक्ताओं एवं उनके परिवार हेतु जीवन बीमा,आकस्मिक की मृत्यु पर कम से कम 50 लाख की व्यवस्था अधिवक्ताओं व परिजनों की, किसी भी बीमारी की स्थिति में बेहतर मुफ्त चिकित्सा की व्यवस्था की जानी चाहिए। इसके अलावा सभी अक्षम व वृद्ध अधिवक्ताओं हेतु पेंशन तथा पारिवारिक पेंशन की व्यवस्था की मांग है। लोक अदालतों के कार्य वकीलों के जिम्मे हो (न्यायिक पदाधिकारियों व न्यायाधीशों के स्थान पर वरिष्ठ व योग्य अधिवक्ताओं की नियुक्ति की जाए।


सभी अधिवक्ताओं को उचित मूल्य पर गृह निर्माण हेतु भूखंड की व्यवस्था के साथ ही सभी ट्रिब्यूनल्स, कमीशन आदि में न्यायिक पदाधिकारियों व न्यायाधीशों के स्थान पर योग्य व वरिष्ठ अधिवक्ताओं को नामित किया जाए। उपरोक्त मांगों की पूर्ति हेतु केंद्र सरकार अधिवक्ताओं के कल्याण हेतु वार्षिक बजट में 5000 करोड़ रुपए का प्रस्ताव पारित कराए, ताकि उपरोक्त मांगे पूरी हो सके।
इन तमाम मांगों के समर्थन में देहरादून अधिवक्ता एसोसिएशन ने भी बार कॉउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा प्रस्तावित मांगों का सर्मथन किया तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अनुरोध किया है कि आजादी के बाद से आज तक अधिवक्ताओं के कल्याणनार्थ कोई योजना शुरू नहीं की गयी और न ही केंद्र सरकार द्वारा आश्वासन के बावजूद बजट में कोई व्यवस्था की गयी। देहरादून अधिवक्ता एसोसिएशन देहरादून के सभी अधिवक्ताओं द्वारा बार कॉउंसिल ऑफ इंडिया के निर्देशानुसार इस हेतू राष्ट्रव्यापी विरोध व शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट मार्च किया, ताकि केंद्र सरकार तत्काल इन मांगों के विषय में सार्थक पहल कर अधिवक्ताओं के हितों को संरक्षित करने हेतु बजट में व्यवस्था की जाए। ज्ञापन देने वालों में सैकड़ों अधिवक्तागण शामिल थे।

ज्ञापन देने में बार एसोसिएशन देहरादून के अध्यस्क मनमोहन कंडवाल , बार काँसिल ऑफ उत्तराखंड के सदस्य चंद्र शेखर तिवारी , राजबीर सिंह  बिष्ट , शुखपाल , कुलदीप सिह  , सतेंद्र रावत , राहुल चंदेल , आर पी पन्त , राम सिंह रावत व कई सौ अधिवक्तागण शामिल रहे।

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