नौकरशाहों पर नकेल के लिए आर-पार के मूड में मंत्री हरक सिंह !

देहरादून। कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने अपनी ही सरकार के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जी हां उत्तराखंड की जनता भले ही ये सोच रही है कि कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत लालढांग चिल्लरखाल मोटर मार्ग के बहाने अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं, लेकिन ये कम ही लोगों को पता होगा कि ओम प्रकाश मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के सबसे खासमखास अधिकरियों में से एक हैं, जो मुख्यमंत्री के सबसे नजदीकी अधिकारी हैं।
हरक सिंह रावत ने अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश को लालढांग चिल्लरखाल मोटर मार्ग पर रोक के बहाने मुख्यमंत्री की कार्यप्रणाली को सीधे चुनौती दी है कि प्रदेश के जिन अधिकारियों की मुख्यमंत्री से नजदीकियां हैं, वह मंत्रियों को कुछ पूछ ही नहीं रहे हैैं और ओम प्रकाश और प्रमुख वन संरक्षक जयराज उनमें एक हैं, जो मंत्रियों के पूछे बिना मुख्यमंत्री से कुछ भी करा देते हैं।
उदाहरण के तौर पर लालढांग चिल्लरखाल मोटर मार्ग पर अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने रोक लगा दी और वन मंत्री से इस बारे में पूछा तक नहीं। दूसरा प्रमुख वन संरक्षक जयराज को ही देख लीजिए, जिन्होंने वन मंत्री को विदेश जाने के लिए पूछा तक नहीं और मुख्यमंत्री से अपने विदेश जाने की फाइल पर साइन करा दिए। ये प्रमुख वन सरंक्षक जयराज की मुख्यमंत्री से सीधी पहुंच नहीं तो क्या है? जिस बारे में वन मंत्री को पता तक नहीं होता है और जयराज मुख्यमंत्री की अनमति पर विदेश चले जाते हैं, जबकि वन विभाग के सूत्रों की माने तो जयराज को विदेश जाना इस समय इतना जरूरी नहीं था, जितना जरूरी इस समय उनका उत्तराखंड में रहना था।
हरक को मिल रहा है समर्थन
हरक सिंह रावत ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली और मंत्रियों के विभागों में सीधे हस्तक्षेप का जो मुदा उठाया, उससे कई मंत्री अंदरखाने इतने खुश हैं कि उनकी मन की आवाज को जैसे हरक सिंह रावत ने पंख लगाने का काम कर दिया है। मुख्यमंत्री कई मंत्रियों के विभागों में इतने हस्तक्षेप कर रहे हैं कि मंत्रियों के पास ट्रांसफर करने की फाइल तब पहुंच रही है, जब अधिकारी ट्रांसफर होने के बाद दूसरी जगह कार्यभार भी संभाल चुके हैं।
हरक सिंह रावत ने जिस बात को उठाया है उसे त्रिवेंद्र कैबिनेट में न तो कोई मंत्री उठा पाया है और न भाजपा का कोई विधायक।

हरक सिंह रावत तो यहां तक कहते हैं कि किसी और में ये दम नहीं कि कोई अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर खुलकर बोले। वहीं हरक सिंह रावत ने जिन दो मुद्दों को लेकर अपनी ही सरकार पर सवाल खड़े किए हैं, उसको लेकर कई भाजपा विधायक उनका समर्थन भी कर रहे हैं और जब से हरक सिंह ने मोर्चा खोला है भाजपा के कई विधायक हरक से मिलकर उनकी पीठ भी थपथपा चुके हैं। वहीं क्या भाजपा और क्या कांग्रेस हर कोई नेता हरक कि इस बेबाक तरीके से आवाज उठाने के तरीके की सराहना कर रहा, जिससे ब्यूरोक्रेट्स  की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
बगावत के माहिर खिलाड़ी हैं हरक
हरक सिंह रावत उत्तराखंड के जितने दबंग नेता के रूप में जाने जाते हैं, उससे ज्यादा उन्हें अब बगावती खिलाड़ी के रूप में भी पहचाने जाने लगा है। मुख्यमंत्री के करीबी अधिकारियों पर हमला बोलकर हरक सिंह रावत ने एक तरह के बगावती तेवर दिखा दिए हैं कि उनके लिए मंत्री-विधायकी कुछ मायने नहीं रखती है। अगर वह बगावत पर आएं तो फिर वह क्या कर सकते हैं, ये सब को पता है।
खैर सब यही सोच रहे हैं कि भाजपा इस समय प्रचंड बहुमत में है और सरकार से बैर लेने का कोई फायदा नहीं मिलने वाला है, लेकिन हरक सिंह रावत कब क्या गुल खिला दे, ये पता नहीं चलता।  क्योंकि जब-जब हरक सिंह ने किसी भी मुख्यमंत्री के खिलाफ मोर्चा खोला है, उसके पीछे छोटी नहीं, बहुत बड़ी कहानी रही है।
सूत्रों के मुताबिक हरक के तल्ख तेवरों के बाद मुख्यमंत्री आवास से कई बार हरक सिंह रावत को फोन किए गए, लेकिन हरक सिंह रावत ने बात करने से इंकार किया है। हालांकि अब मुख्यमंत्री ने कहा है कि हरक सिंह रावत नराज नहीं हैं और उनकी बात हरक सिंह रावत से हो गई है, लेकिन देखना यही होगा कि आखिर जिस लड़ाई को लडऩे की बात हरक सिंह रावत कर रहे हैैं, वह लड़ाई इस समय वे किसके खिलाफ लड़ रहे हैं, यह तो समय आने पर ही पता चलेगा, लेकिन इतना तय है कि जिन दो मुद्दों को लेकर हरक ने मोर्चा खोला था, उनमें नाराजगी पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत नाराज नहीं हैं। जहां तक लालढांग चिल्लरखाल मोटर मार्ग की बात है तो कुछ अड़चने मार्ग के निर्माण को लेकर आ रही हैं, जिन्हें दूर कर दिया जाएगा। लालढांग चिल्लरखाल मोटरमार्ग जरूर बनेगा, ये हमारी सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट है।
प्रमुख वन संरक्षक जयराज के विदेश जाने को लेकर जहां वन मंत्री हरक सिंह रावत ने मोर्चा खोला हुआ है, वहीं पहली बार वन सरंक्षक के विदेश जाने के मुद्दे पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रतिक्रिया देते हुए जयराज का बचाव करते हुए कहा कि विदेश दौरे कई महीने पहले लग जाते हैं। ये प्रशिक्षण को लेकर दौरा है, इस पर सवाल उठाना सही नहीं है। प्रशिक्षण का समय उत्ततराखंड और भारत तय नहीं करेगा।

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