एनआरएचएम मेें घोटाले की जांच लटकी

दोषियों को दंडित करने के बजाय पिछली सरकार का दवा घोटाला वर्तमान सरकार के लिए सियासी दांव-पेंच का हथकंडा बनकर रह गया

पर्वतजन ब्यूरो

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उत्तराखंड की पर्वतीय तथा मैदानी क्षेत्रों में निवास करने वाली गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य लाभवद्र्धन के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2006 से वर्ष 2010 की अवधि में तकरीबन 600 करोड़ रुपया उत्तराखंड सरकार को आवंटित किया था। दुर्भाग्यवश भाजपा सरकार के तत्कालीन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक एवं राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य सलाहकार परिषद के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष पद पर नामित अजय भट्ट की लापरवाही एवं संरक्षण में उच्च स्तरीय दवा घोटाला घटित हुआ। दवाओं की खरीद और वितरण की वितरण का कार्य अनियमिततापूर्वक कराया गया। जिस कारण 1 करोड़ रुपए से भी अधिक की दवाएं एक्सपायर हो गई थी। इन दवाओं को रुड़की नगर के नहरों तथा मैदानों में फेंक दिया गया था, लेकिन आस-पास रहने वाले लोगों की सूचना पर यह मामला पकड़ में आ गया।
हरिद्वार के समाजसेवी तथा आरटीआई कार्यकर्ता रमेशचंद्र शर्मा ने इस प्रकरण की सूचना आयोग के माध्यम से जांच करवाई थी, किंतु सूचना आयोग की जांच अधिकारी ने जांच करने में असमर्थता जाहिर की। इस पर तत्कालीन सूचना आयुक्त अनिल शर्मा ने इस प्रकरण की सीबीआई जांच करने की संस्तुति की थी। आज से 3 साल पहले 31 दिसंबर 2013 को यह संस्तुति की गई थी, किंतु तत्कालीन विजय बहुगुणा के नेतृत्व वाली सरकार में यह मामला फाइलों में दबा रहा। 11 अप्रैल 2014 को इस प्रकरण को गंभीर मानते हुए सीबीआई जांच के आदेश पारित किए थे, किंतु उसके बावजूद भी आज तक यह मामला फाइलों में ही कैद रहा। मंत्री के आदेशों के अनुपालन में गृह विभाग ने जांच शुरू कर दी।
ajay-bhatt-g सीबीआई शाखा देहरादून के प्रमुख सुजीत कुमार ने 14 सितंबर 2014 को सचिव गृह तथा प्रमुख सचिव चिकित्सा को लिखित में यह निर्देश दिया था कि गंभीर दवा घोटाला प्रकरण के खिलाफ कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया जाए। तब तक सीबीआई जांच प्रक्रिया प्रतीक्षारत रखी जाएगी, किंतु इस उच्च स्तरीय एनआरएचएम दवा घोटाला प्रकरण की अभी तक सीबीआई जांच दो कदम भी आगे नहीं बढ़ पाई है। कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा के तत्कालीन दोषी राजनेताओं के दबाव में शासन के आला अधिकारी इस प्रकरण में हाथ नहीं डालना चाहते। रमेशचंद्र शर्मा ने 9 जून 2016 को मुख्यमंत्री से मिलकर इस जांच में बरती जा रही लापरवाही को लेकर आपत्ति व्यक्त की।
इस पर मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को आदेश दिए कि वह सीबीआई जांच वाली फाइल को अनुशंसा सहित प्रस्तुत करें, किंतु मुख्यमंत्री के आदेश जलेबी की तरह घूम रहे हैं।
जाहिर है कि मुख्यमंत्री के आदेशों के बाद इस प्रकरण में बरती जा रही हीलाहवाली के पीछे एक बड़ा षडयंत्र काम कर रहा है।

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