नहीं रहा बालीवुड का दयावान

अपने जमाने के हेंडसम विलेन और और बाद मे हीरो बने विनोद खन्ना का निधन हो गया. कैंसर से जूझते हुये उन्होने ने 70 साल की उम्र में अलविदा कह दिया। उन्होने ‘कुर्बानी’, ‘पूरब और पश्चिम’, ‘मेरे अपने’, ‘रेशमा और शेरा’, ‘हाथ की सफाई’, ‘हेरा फेरी’, ‘मुकद्दर का सिकंदर’ जैसी कई शानदार फिल्मों में शानदार अभिनय किया। विनोद खन्ना ने शुरुआत तो विलेन के किरदार से की लेकिन बाद में हीरो बन गए. विनोद खन्ना कपड़ा उधोगपति किशन चन्द्र खन्ना के बेटे थे। जो उस समय जाने माने कपड़ा व्यवसायी थे। उनका टेक्सटाइल बिजनेस बंबई से पेशावर तक फैला था। उनके पिता चाहते थे की वे उनका व्यवसाय संभालें लेकिन उन्हें यह रास नहीं आया। विनोद खन्ना ने पहली फिल्म 1968 में सुनील दत्त की होम प्रोडक्शन फिल्म मन का मीत की। विनोद खन्ना की शुरुआती पढ़ाई लिखाई मुंबई के सेंट मैरी और सेंट जेवियर्स हाई स्कूल में हुई. लेकिन बेहतर पढ़ाई लिखाई के लिहाज से मुंबई के पास देवलाली के बार्न्स स्कूल भेज दिया गया. यहां विनोद खन्ना 12वीं क्लास तक स्कूल के ह़ॉस्टल में रहे. लेकिन कॉलेज की पढ़ाई के लिए वापस मुंबई गए। बोर्डिंग स्कूल के दिनों में मुगल-ए-आजम और सोलवां साल जैसी फिल्में देखने के बाद लगा था.

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