नुक्ताचीनी// सहकर्मी के साथ सिनेमा!

फिल्म देखने का शौक भी कभी-कभी बहुत भारी पड़ जाता है। दरअसल हुआ यह कि एक निगम में कार्यरत कर्मचारी का मन हुआ कि शहर में नई फिल्म लगी है तो देखी जाए। उसने बड़ी मुश्किल से अपनी सहकर्मी को मनाया कि फिल्म देखते हंै। डरते-डरते सहकर्मी मान गई और कार्यालय में बहाना बनाया कि […]

फिल्म देखने का शौक भी कभी-कभी बहुत भारी पड़ जाता है। दरअसल हुआ यह कि एक निगम में कार्यरत कर्मचारी का मन हुआ कि शहर में नई फिल्म लगी है तो देखी जाए। उसने बड़ी मुश्किल से अपनी सहकर्मी को मनाया कि फिल्म देखते हंै। डरते-डरते सहकर्मी मान गई और कार्यालय में बहाना बनाया कि सर मुझे कोर्ट में वकील के पास जाना है, उन्होंने लंच के बाद बुलाया है। ठीक इसी प्रकार कर्मचारी ने कुछ बहाना बनाया और दोनों चल दिए। अलग-अलग निकलकर कार्यालय से कुछ दूरी पर इकट्ठा होकर वे फिल्म देखने चले गए। खुशी-खुशी पिक्चर का मजा ले रहे थे, पर कहा जाता है कि किस्मत का लिखा टाला नहीं जा सकता। मध्यावकाश के समय दोनों बाहर निकले व महिला मूत्रालय में चली गयी। उसी समय निगम में कार्यरत सज्जन की मुलाकात एक दूसरे सज्जन से हुई, जो शिक्षा विभाग में कार्यरत थे। शिक्षा विभाग वाले सज्जन कुछ परेशान नजर आये, पर निगम कर्मी के समझ में नहीं आया कि वे क्यों परेशान हो रहे हैं। शिक्षा विभाग वाले भाई साहब बड़ी मुश्किल से अपना पसीना पोंछते हुए निकल ही रहे थे कि अब निगम वाले भाई का पसीना पोंछने का नंबर था। इसी समय शिक्षा विभाग वाले भाई को एक महिला की आवाज आई जल्दी चलो पिक्चर शुरू हो गयी निगम वाले भाई को आवाज पहचानी सी लगी पलट के देखा तो पाँव तले जमीन खिसक गयी महिला कोई और नहीं उसकी अपनी ही बीवी थी। ठीक उसी समय वासरूम से निगम वाले भाई की महिला मित्र भी आ धमकी बस फिर क्या था वही पर नयी पिक्चर बन गई। पड़ोसियों के मुताबिक इस बात को लेकर उन दोनों पति-पत्नी में फिल्म को लेकर कोई बहस नहीं हुई। और हां! निगम वाले भाई की पत्नी भी शिक्षा विभाग मे ही कार्यरत थी। फिलहाल आज तक गृहस्थी ठीक चल रही है।

…तो ‘उनसे’ कह देंगे!

सचिवालय में महाराष्ट्र नव निर्माण सेना ‘मनसेÓ की तर्ज पर ‘उनसेÓ (उत्तराखंड नव निर्माण सेना) का गठन हो गया है। सचिवालय में भ्रष्ट ब्यूरोक्रेट आरके सुधांशु की हठधर्मिता के चलते उत्तराखंड मूल के अफसरों व कर्मचारियों के साथ भेदभाव किया जा रहा था। इसी से व्यथित होकर उत्तराखंड मूल के अधिकारियों ने उनसे का गठन कर लिया है। काफी लंबे समय से उच्चाधिकारियों के कहने के बावजूद भी सचिवालय सेवाओं का अधियाचन लोक सेवा आयोग में नहीं भेजा रहा था और न ही विभिन्न संवर्गों से सचिवालय में काम कर रहे सहायक समीक्षा अधिकारियों तथा समीक्षा अधिकारियों के संविलयन भी काफी समय से अटके पड़े थे। उनसे के गठन के बाद से इन पर कार्यवाही हो गई है। इसके साथ ही सचिवालय सेवाओं में दूसरे प्रदेशों के अभ्यर्थियों पर रोक लगाने के लिए रोजगार कार्यालय में पंजीकरण की अनिवार्यता भी करा दी गई है। ‘उनसेÓ के संस्थापक वीरेंद्र कंडारी की नई मुहिम अब सचिवालय सेवा में उत्तीर्ण परीक्षार्थियों के मूल निवास प्रमाण पत्र की जांच करना भी है। कुछ लोग तो अब आंखें तरेरकर रौब भी दिखाने लगे हैं कि हमारे काम में टांग अड़ाई तो ‘उनसेÓ कह देंगे। देखते हैं लोगों की उम्मीदें उनसे कितनी पूरी हो पाती हैं।

हर बात पर इस्तीफा!

पहले ही लोग जल्दी चुनाव, आचार संहिता लागू होने के शिगूफे छोड़ रहे हैं। ऊपर से ये सीएम हैं कि हर बात पर इस्तीफा देने की धमकी दे देते हैं। अब बेचारे विधायक अपनी मांगों और नाराजगियों की भभकी किसे दिखाएं। पिछले दिनों कई विधायकों और कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने नाराजगी जताने वाले लहजे में पीडीएफ वालों को कोसते हुए अपनी कुछ मांगें रखी तो मुख्यमंत्री ने उल्टे उन्हीं को खरी-खरी सुना दी। मुख्यमंत्री यहां तक बोल पड़े कि मुझसे अगर इतनी ही दिक्कत है तो हाईकमान से मेरा इस्तीफा मांग लो या फिर मुझी से इस्तीफा ले लो। बेचारे, फरियादी यह सोच कर आए थे कि दबाव डालकर कुछ निचोड़ लेंगे, लेकिन यहां तो खुद ही निचुड़ गए।

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