अभिभावक संघ अध्यक्ष शूरवीर डोभाल ने केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री से की उच्चस्तरीय जांच की मांग, ₹42 करोड़ खर्च और महज 40 प्रतिशत काम होने के दावे ने खड़े किए सवाल
चकराता/देहरादून, 9 अक्टूबर 2026।नीरज उत्तराखंडी
आदिवासी बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए स्वीकृत एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय का भवन चार साल बाद भी अधूरा होने का आरोप है। मेहरावना स्थित विद्यालय के निर्माण को लेकर अब सरकारी धन के उपयोग, निर्माण की गति और गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।
अभिभावक संघ के अध्यक्ष शूरवीर डोभाल ने केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री को पत्र भेजकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि जब विद्यालय भवन निर्माण पर लगभग ₹42 करोड़ खर्च होने का दावा किया जा रहा है, तो निर्माण की वास्तविक प्रगति क्या है? क्या खर्च की गई धनराशि के अनुरूप काम हुआ है? यदि नहीं, तो इसकी जवाबदेही किसकी है?
₹42 करोड़ खर्च, फिर भी निर्माण अधूरा!
अभिभावक संघ अध्यक्ष शूरवीर डोभाल ने 4 अक्टूबर 2026 को भेजे पत्र में आरोप लगाया है कि चार वर्ष बीतने के बावजूद विद्यालय भवन का निर्माण पूरा नहीं हुआ है। उनके अनुसार, लगभग ₹42 करोड़ खर्च होने के बावजूद मौके पर करीब 40 प्रतिशत निर्माण कार्य ही हुआ है।
हालांकि, ₹42 करोड़ के व्यय और 40 प्रतिशत निर्माण की स्थिति की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में निर्माण एजेंसी, संबंधित विभाग और परियोजना के वित्तीय अभिलेखों की जांच आवश्यक है।
उपलब्ध सरकारी ई-टेंडर अभिलेख में मेहरावना स्थित एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय की निर्माण एवं विकास परियोजना की अनुमानित निविदा लागत ₹45,76,18,927 यानी लगभग ₹45.76 करोड़ दर्ज है। यह निविदा लागत है, वास्तविक भुगतान या अब तक हुए खर्च का प्रमाण नहीं। लेकिन इससे परियोजना के वित्तीय आकार का अंदाजा जरूर मिलता है।
निर्माण एजेंसी NPCC की जवाबदेही कौन तय करेगा?
इस परियोजना का निर्माण कार्य राष्ट्रीय परियोजना निर्माण निगम लिमिटेड (NPCC) से संबंधित है। अभिभावक संघ अध्यक्ष ने निर्माण की धीमी गति और गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं।
अब सवाल यह है कि निर्माण कार्य की निर्धारित समयसीमा क्या थी? काम पूरा करने की मूल समयसीमा के मुकाबले कितनी देरी हुई? परियोजना की निगरानी करने वाले अधिकारियों ने समय-समय पर क्या निरीक्षण किया? यदि निर्माण में देरी हुई है, तो क्या संबंधित एजेंसी पर कोई जुर्माना लगाया गया या जवाबदेही तय की गई?
इन सवालों के जवाब केवल आश्वासनों से नहीं, बल्कि कार्यादेश, भुगतान विवरण, माप पुस्तिका (एमबी), गुणवत्ता जांच रिपोर्ट और विभागीय निरीक्षण अभिलेखों से मिलने चाहिए।
सरकारी धन जनता की अमानत है। निर्माण में देरी और गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आएं, तो जांच और जवाबदेही तय करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
भवन की देरी का खामियाजा आखिर कौन भुगत रहा है?
एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय का उद्देश्य जनजातीय विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे में विद्यालय के अपने भवन का निर्माण समय पर पूरा न होने का मुद्दा महज निर्माण कार्य तक सीमित नहीं है।
अभिभावक संघ अध्यक्ष का कहना है कि भवन निर्माण में देरी से विद्यार्थियों को अपेक्षित शैक्षणिक सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। उन्होंने विद्यालय का निर्माण शीघ्र पूरा कराकर विद्यार्थियों को मूल भवन में स्थानांतरित करने की मांग की है।
यहां सबसे बड़ा सवाल विद्यार्थियों के भविष्य का है। जिन बच्चों के लिए करोड़ों रुपये की परियोजना बनाई गई, उन्हें निर्धारित समय पर सुविधाएं क्यों नहीं मिल पा रहीं? क्या किसी ने इस देरी की जिम्मेदारी ली है?
केंद्रीय मंत्री से उच्चस्तरीय जांच की मांग
शूरवीर डोभाल ने केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री से मामले में हस्तक्षेप करने, निर्माण की वास्तविक प्रगति और खर्च की गई धनराशि की जांच कराने तथा गुणवत्ता संबंधी शिकायतों की निष्पक्ष पड़ताल करने का अनुरोध किया है। पत्र की प्रतिलिपि जिलाधिकारी, देहरादून को भी भेजे जाने का उल्लेख है।
अब निगाहें संबंधित मंत्रालय, निर्माण एजेंसी और जिला प्रशासन पर हैं। क्या शिकायत पर स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाएगी? क्या परियोजना की शुरुआत से अब तक जारी धनराशि और किए गए भुगतान का हिसाब सार्वजनिक होगा? क्या निर्माण की समयसीमा और देरी के कारणों की जानकारी सामने आएगी?
इन सवालों का जवाब मिलना जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि परियोजना में देरी के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता हुई है, तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है।
अब इन पांच बिंदुओं पर चाहिए स्पष्ट जवाब
1. कुल स्वीकृत बजट कितना है और अब तक वास्तव में कितना भुगतान किया गया है?
2. निर्माण कार्य शुरू होने और पूरा होने की निर्धारित तिथियां क्या थीं?
3. वर्तमान में निर्माण की वास्तविक भौतिक प्रगति कितनी है?
4. निर्माण की गुणवत्ता की जांच कब-कब हुई और रिपोर्ट में क्या पाया गया?
5. देरी के लिए किस स्तर पर जवाबदेही तय की गई और विद्यार्थियों को भवन कब तक मिलेगा?
39 करोड़ खर्च, 65 प्रतिशत काम पूरा होने का दावा
मेहरावना एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय के निर्माण कार्य को लेकर परियोजना प्रबंधक विशाल यादव की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, परियोजना की स्वीकृत लागत 45 करोड़ 76 लाख रुपये है, जबकि 15 करोड़ रुपये की अतिरिक्त संशोधित लागत प्रस्तावित है। निर्माण कार्य पर अब तक लगभग 39 करोड़ रुपये खर्च किए जाने तथा भौतिक प्रगति 65 प्रतिशत होने की जानकारी दी गई है।
निर्माण कार्य पूरा करने की समयसीमा 31 मार्च 2026 निर्धारित बताई गई है। गुणवत्ता जांच के संबंध में बताया गया कि समय-समय पर निर्माण एजेंसी के स्तर पर और थर्ड पार्टी के माध्यम से जांच कराई जाती रही है। जांच के दौरान सामने आई कमियों को सुधारने का भी दावा किया गया है।
हालांकि, निर्माण कार्य में देरी के लिए संबंधित एजेंसी या अधिकारियों की जवाबदेही तय किए जाने के संबंध में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। वहीं, 15 करोड़ रुपये की प्रस्तावित संशोधित लागत की स्वीकृति, गुणवत्ता जांच की रिपोर्ट और निर्माण कार्य पूरा होने की नई समयसीमा के संबंध में आधिकारिक दस्तावेजों से पुष्टि होना बाकी है।
निष्कर्ष: मेहरावना के एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय का मामला केवल अधूरे भवन का नहीं, बल्कि सरकारी परियोजनाओं की निगरानी, सार्वजनिक धन के उपयोग और जनजातीय विद्यार्थियों को समय पर सुविधाएं उपलब्ध कराने की जवाबदेही का है। अभिभावक संघ की शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि अनियमितता या लापरवाही प्रमाणित होती है, तो नियमानुसार जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए।






