बड़ी खबर: जांच के घेरे में सौर स्वरोजगार योजना की 81 परियोजनाएं

मोरी, पुरोला और नौगांव में 67 प्लांट स्थापित; सरकारी तंत्र से जुड़े लोगों के लाभ की शिकायतों पर 2025 में हुई थी जांच—रिपोर्ट अब भी सवालों में उत्तरकाशी।नीरज उत्तराखंडी  मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के तहत उत्तरकाशी के मोरी, पुरोला और नौगांव विकासखंडों में स्वीकृत 81 परियोजनाओं की आवंटन प्रक्रिया अब दस्तावेजी जांच का विषय बन […]

  • मोरी, पुरोला और नौगांव में 67 प्लांट स्थापित; सरकारी तंत्र से जुड़े लोगों के लाभ की शिकायतों पर 2025 में हुई थी जांच—रिपोर्ट अब भी सवालों में

उत्तरकाशी।नीरज उत्तराखंडी 

मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के तहत उत्तरकाशी के मोरी, पुरोला और नौगांव विकासखंडों में स्वीकृत 81 परियोजनाओं की आवंटन प्रक्रिया अब दस्तावेजी जांच का विषय बन गई है।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इन परियोजनाओं में 67 प्लांट स्थापित हो चुके हैं। मोरी में 30 में 29, पुरोला में पांचों और नौगांव में 46 में 33 परियोजनाएं स्थापित बताई गई हैं। तीनों विकासखंडों की स्थापित क्षमता करीब 13.25 मेगावाट है।

मामला इसलिए महत्वपूर्ण है कि वर्ष 2025 में मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के आवंटन में सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों अथवा उनके परिजनों को लाभ मिलने तथा ‘पहले आओ, पहले पाओ’ व्यवस्था के पालन पर शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद प्रमुख सचिव ऊर्जा स्तर से जिलाधिकारियों को पूर्व आवंटनों की जांच के निर्देश दिए जाने की रिपोर्ट सामने आई। नियम-विरुद्ध मामले मिलने पर सब्सिडी रोकने की बात भी कही गई थी।

नियम में आवेदन का क्रम महत्वपूर्ण

मार्च 2023 में संशोधित योजना के प्रावधानों के अनुसार निर्धारित क्षमता से अधिक आवेदन आने की स्थिति में, पूर्ण दस्तावेजों के साथ पोर्टल पर आवेदन प्राप्त होने की तारीख के आधार पर ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के अनुसार परियोजना आवंटित की जानी थी। तकनीकी व्यवहार्यता भी चयन का अनिवार्य हिस्सा थी।

इसलिए मोरी, पुरोला और नौगांव की प्रत्येक परियोजना में केवल लाभार्थी का नाम देखना पर्याप्त नहीं होगा। आवेदन की सटीक तारीख, दस्तावेज पूर्ण होने की तारीख, तकनीकी व्यवहार्यता रिपोर्ट और Letter of Award की तारीख को एक साथ देखना जरूरी है।

एक परिवार से एक परियोजना का प्रावधान

संशोधित योजना में एक परिवार से एक आवेदक को परियोजना दिए जाने का प्रावधान भी है। इसलिए जांच में पति-पत्नी, माता-पिता और संतान अथवा अन्य पारिवारिक सदस्यों के नाम पर एक से अधिक आवेदन/परियोजनाओं का मिलान भी आवश्यक है। हालांकि केवल एक जैसा उपनाम या पारिवारिक संबंध किसी नियम उल्लंघन का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

मोरी में सबसे अधिक, नौगांव में सबसे ज्यादा स्वीकृतियां

उपलब्ध ब्लॉकवार आंकड़ों के अनुसार—

विकासखंड| स्वीकृत परियोजनाएं| स्थापित| स्थापित क्षमता
मोरी| 30| 29| 5,800 किलोवाट
पुरोला| 5| 5| 850 किलोवाट
नौगांव| 46| 33| 6,600 किलोवाट
कुल| 81| 67| 13,250 किलोवाट

मोरी के कुकरेड़ा क्षेत्र में सौर परियोजनाओं का उल्लेख क्षेत्रीय रिपोर्टों में भी हुआ है। वहां परियोजनाओं की संख्या अधिक होना अपने आप में अनियमितता नहीं है। वास्तविक स्थिति जानने के लिए प्रत्येक परियोजना की नामवार फाइल और आवंटन क्रम की जांच जरूरी होगी।

2025 की जांच का निष्कर्ष सबसे बड़ा सवाल

सरकार द्वारा 2025 में जांच के निर्देश दिए जाने के बावजूद उत्तरकाशी में इस जांच का अंतिम निष्कर्ष, जांचे गए मामलों की संख्या और कार्रवाई का पूरा विवरण सार्वजनिक रिकॉर्ड में स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया है।

यही इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण सवाल है—यदि शिकायतों की जांच हुई तो कितने मामले जांचे गए? क्या किसी अधिकारी अथवा कर्मचारी के परिजन को परियोजना मिली? क्या आवंटन नियमों के अनुरूप पाया गया? और यदि कहीं अनियमितता मिली तो सब्सिडी या परियोजना पर क्या कार्रवाई हुई?

UERC ने भी परियोजनाओं की पूरी फाइल मांगी

मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू 2026 में उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) की कार्यवाही है। आयोग ने MSSY की 200 किलोवाट क्षमता वाली परियोजनाओं के मामलों में UREDA से आवंटन से लेकर कमीशनिंग तक की पूरी कालानुक्रमिक जानकारी, प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग रिपोर्ट और संबंधित अभिलेख मांगे हैं।

UERC के रिकॉर्ड में ऐसे मामले भी सामने आए जिनमें आवेदकों ने 2024 में आवेदन करने के बावजूद 2026 में Letter of Award जारी होने की बात उठाई। इससे यह प्रश्न महत्वपूर्ण हो जाता है कि आवेदन, तकनीकी व्यवहार्यता और आवंटन के बीच कितना समय लगा और देरी किस स्तर पर हुई।

रिश्तेदारी नहीं, भूमिका बनेगी असली कसौटी

किसी सरकारी कर्मचारी या अधिकारी के रिश्तेदार का सौर परियोजना का लाभार्थी होना अपने आप में अनियमितता सिद्ध नहीं करता। निर्णायक सवाल यह होगा कि संबंधित कर्मचारी की परियोजना की जांच, तकनीकी परीक्षण, आवंटन, विद्युत कनेक्शन, निरीक्षण, सब्सिडी अथवा भुगतान प्रक्रिया में कोई भूमिका थी या नहीं।

यदि रिश्तेदारी के साथ-साथ आवंटन प्रक्रिया में असामान्यता अथवा संबंधित कर्मचारी की निर्णयकारी भूमिका भी सामने आती है, तभी हितों के टकराव का गंभीर प्रश्न पैदा होगा।

2026 की अद्यतन नामवार सूची जरूरी

UREDA की वेबसाइट पर MSSY से संबंधित योजना और स्थापित परियोजनाओं की सूची उपलब्ध है, लेकिन सार्वजनिक वेबसाइट पर उपलब्ध सामग्री 2026 के पूरे परियोजना आंकड़ों के अनुरूप अद्यतन दिखाई नहीं देती। इसलिए मोरी, पुरोला और नौगांव की 2026 की पूर्ण नामवार लाभार्थी सूची सार्वजनिक किया जाना जरूरी है।

इस सूची के साथ प्रत्येक परियोजना की आवेदन तिथि, भूमि विवरण, तकनीकी व्यवहार्यता रिपोर्ट, जिला समिति की कार्यवाही, Letter of Award, PPA, कमीशनिंग प्रमाणपत्र तथा सब्सिडी/भुगतान का विवरण सामने आए तो पूरी तस्वीर साफ हो सकती है।

Also Read This

गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में बवाल! कुलसचिव से मारपीट, जमीन पर गिराकर पीटा

हरिद्वार। हरिद्वार स्थित गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में शनिवार सुबह उस समय हंगामा हो गया, जब कुलपति कार्यालय के बाहर कुलसचिव सत्यदेव निगमालंकार के साथ...

बड़ी खबर: BRIDCUL के निर्माण कार्यों पर उठे सवाल । कहीं गुणवत्ता पर सवाल, कहीं ठेका निरस्त

BRIDCUL के निर्माण कार्यों पर उठे सवाल कहीं पुल का स्पान 36 से 42 और फिर 60 मीटर हुआ, कहीं धीमी प्रगति पर...
Parvatjan Team
Parvatjan Team
Parvatjan Team is dedicated to delivering the latest, accurate, and reliable news from Uttarakhand. We cover local issues, administrative updates, public interest stories, and breaking news in a clear and simple manner.

Related Posts