आरटीआई से खुलासा: मृतक श्रमिकों के नाम पर भी बांटी गई श्रमिक किट, फर्जीवाड़े का बड़ा मामला

देहरादून: उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की कार्यप्रणाली में गंभीर खामियां सामने आई हैं। सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त दस्तावेजों से पता चला है कि बोर्ड द्वारा जारी की गई श्रमिक किट वितरण की सूची में दर्जनों ऐसे नाम शामिल हैं, जिन्हें वास्तव में कोई लाभ नहीं मिला, बल्कि मृत व्यक्तियों के नाम तक पर किट जारी दिखाई गई है।

आरटीआई कार्यकर्ता कमल किशोर की ओर से मांगी गई जानकारी में बोर्ड ने जो सूची उपलब्ध कराई, उसमें कम से कम 45 से अधिक ऐसे मामले सामने आए हैं जहां नाम तो वितरण सूची में दर्ज हैं, लेकिन हकीकत में किट नहीं पहुंची। इनमें स्वाति, पार्वती, संगीता, सरिता, अशोक, सूरज, विनोद, विकास पंत, अजय पंत, आनंद, ऋतु, आनंद, जगदीश, राजेंद्र, सुमित्रा जायसवाल, रवि, राकेश, सुषमा, रिकी वर्मा, दुलीचंद, रोहित, विमल यादव, ममता, कमल, बबीता, माम चंद, मीना देवी, लवकी शर्मा, धीर सिंह जैसे नाम शामिल हैं।

खास बात यह है कि सूची में कुछ ऐसे व्यक्तियों के नाम भी हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है, फिर भी उनके नाम पर श्रमिक किट जारी होने का रिकॉर्ड दिखाया गया है। इससे बोर्ड की पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

बोर्ड ने 63 करोड़ रुपये की राशन किट खरीदी दिखाई, लेकिन इनमें से कई के बिना अनुमोदन खरीद और वितरण के प्रमाण नहीं मिले। इसी तरह, 33.23 करोड़ रुपये से 22 हजार से अधिक टूल-किट खरीदने का दावा किया गया, लेकिन केवल 426 टूल-किट ही श्रम विभाग ने स्वीकार किए, जबकि 171 के प्राप्ति और वितरण की जानकारी ही नहीं दी गई।

साइकिल वितरण में भी बड़ा घपला उजागर हुआ। बोर्ड ने 32.78 करोड़ रुपये से 83 हजार 560 साइकिलें खरीदी बताईं, लेकिन 10.82 करोड़ रुपये की 31 हजार 645 साइकिलों का कोई हिसाब नहीं। देहरादून जिले में 37 हजार 665 साइकिलें खरीदी गईं बताई गईं, लेकिन मात्र 6,020 साइकिलों की प्राप्ति का विवरण दर्ज है।

इसके अलावा, बिना पंजीकृत श्रमिक कार्ड वाले व्यक्तियों को भी लाभ दिखाया गया, जैसे प्रेमनगर, मोहनपुर, बनियावाला, पीपलताड़, प्रयागमपुर, मिट्टी बेड़ी, अंबीयावाला, शुक्लापुर, संजय कॉलोनी, लक्ष्मीपुर आदि क्षेत्रों में। यहां तक कि आईबीडीटी का इस्तेमाल कर बिना श्रमिक के नाम पर 240 साइकिलें और अन्य लाभ दिए गए।

आरटीआई से प्राप्त जानकारी बोर्ड की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी अनियमितताएं श्रमिकों के कल्याण के लिए बने फंड के दुरुपयोग को दर्शाती हैं। विभागीय अधिकारियों को इस मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग उठ रही है।

📢 खबरों को सबसे पहले पाने के लिए पर्वतजन को फॉलो करें

👉 WhatsApp Channel Join करें 👉 WhatsApp Group Join करें 📲 App Download करें

Related Posts