उत्तराखंड की सोलर योजना में बड़ा घपला

पीएम सूर्य घर योजना में उत्तराखंड में धांधली का बड़ा मामला प्रधानमंत्री सूर्य घर मुक्त बिजली योजना (पीएम सूर्य घर योजना या रूफटॉप सोलर योजना), जिसे केंद्र सरकार ने फरवरी 2024 में शुरू किया था, उत्तराखंड में शानदार सफलता हासिल कर चुकी थी। राज्य ने देश में टॉप प्रदर्शन किया और कई बड़े राज्यों को […]

पीएम सूर्य घर योजना में उत्तराखंड में धांधली का बड़ा मामला

प्रधानमंत्री सूर्य घर मुक्त बिजली योजना (पीएम सूर्य घर योजना या रूफटॉप सोलर योजना), जिसे केंद्र सरकार ने फरवरी 2024 में शुरू किया था, उत्तराखंड में शानदार सफलता हासिल कर चुकी थी। राज्य ने देश में टॉप प्रदर्शन किया और कई बड़े राज्यों को पीछे छोड़ दिया। उत्तराखंड ने 69,181 रूफटॉप सोलर प्लांट इंस्टॉल किए, जिससे यह टॉप-10 राज्यों में शामिल हो गया। राज्य की सोलर क्षमता 58,562 MW तक पहुंची, जो तमिलनाडु (51,227 MW), हरियाणा (48,149 MW), ओडिशा (27,614 MW), तेलंगाना (25,272 MW), छत्तीसगढ़ (21,365 MW), जम्मू-कश्मीर (18,497 MW), कर्नाटक (15,082 MW), बिहार (14,276 MW), हिमाचल प्रदेश (10,777 MW) और दिल्ली (6,022 MW) से अधिक थी।

इस उपलब्धि के लिए केंद्र सरकार ने राज्य को पुरस्कार भी दिया। योजना के प्रमुख लाभ:

परिवारों को मुफ्त या सस्ती बिजली

सरकार पर बिजली सब्सिडी का बोझ कम

स्वच्छ ऊर्जा की ओर तेज प्रगति

कार्बन उत्सर्जन में कमी

मुख्य आंकड़े (उत्तराखंड में):

कुल आवेदन: 1,07,734

इंस्टॉल प्लांट: 69,181

उत्पादन क्षमता: 1,027 MW

रजिस्टर्ड वेंडर: 821

लाभार्थी जिन्हें सब्सिडी मिली: 61,160

रिजेक्ट आवेदन: 571

अब तक जारी सब्सिडी: 524.50 करोड़ रुपये

लेकिन इस सफलता पर अब धांधली का ग्रहण लग गया है। जांच में सामने आया कि कई लोगों (उपभोक्ताओं और अधिकारियों सहित) ने एक ही सोलर प्लांट के लिए केंद्र सरकार की सब्सिडी दो-दो बार हड़प ली। आवेदन पोर्टल पर अलग-अलग कंज्यूमर नंबर और बिजली कनेक्शन नंबर डालकर डबल सब्सिडी का फायदा उठाया गया। सॉफ्टवेयर भी इसे शुरुआत में नहीं पकड़ पाया।

केंद्र सरकार (आरईसी लिमिटेड के माध्यम से) ने इन अनियमितताओं की पहचान की और उत्तराखंड ऊर्जा निगम/विभाग को प्रभावित लोगों की लिस्ट भेजी। रिकवरी नोटिस जारी किए गए हैं, जिसमें गलत सब्सिडी वापस मांगी गई है। वापस न करने पर बिजली कनेक्शन स्थायी रूप से काटे जा सकते हैं।

शुरुआती लिस्ट में 17 नाम शामिल हैं, लेकिन गहन जांच से और नाम सामने आ सकते हैं।

चौंकाने वाली बात: लिस्ट में UREDA (उत्तराखंड नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी) के एक महत्वपूर्ण पद पर बैठे अधिकारी का नाम भी है। इस अधिकारी ने अपने नाम पर दो बार सब्सिडी ली—एक बार 60,000 रुपये और दूसरी बार 85,000 रुपये। उन्हें भी रिकवरी नोटिस जारी किया गया है।

वेंडरों की भूमिका भी जांच के दायरे में है—एक ही कनेक्शन पर कई प्लांट कैसे लगे?

यह पहला मामला नहीं है। पहले भी (2016-2018) रूफटॉप सोलर प्रोजेक्ट में करोड़ों की सब्सिडी घोटाला हुआ था, जिसमें अधिकारियों ने रिश्तेदारों-करीबियों को फायदा पहुंचाया। तब तत्कालीन ऊर्जा सचिव ने इस्तीफा दिया था।

इसके अलावा, 8,000 से अधिक लोग अभी भी अपनी सब्सिडी (विशेषकर राज्य सब्सिडी) के चक्कर काट रहे हैं। 31 मार्च 2025 के बाद राज्य ने अपनी अतिरिक्त सब्सिडी बंद कर दी, अब केवल केंद्र की सब्सिडी मिल रही है। कई लाभार्थी परेशान हैं।

जिस योजना ने उत्तराखंड को देश में नंबर वन बनाया, उसी पर अब धांधली के आरोपों ने सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच जारी है और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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