चमोली / गिरीश चंदोला
मानसून सीजन शुरू होने से पहले ही चमोली जिले के नारायणबगड़ में तेज बारिश ने तबाही जैसे हालात पैदा कर दिए। देर रात हुई मूसलाधार बारिश के बाद भारी मात्रा में मलबा बाजार, स्कूल, दुकानों और राष्ट्रीय राजमार्ग पर आ गया। कई वाहन मलबे की चपेट में आ गए, जबकि हाईवे घंटों बाधित रहा। राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई।
बृहस्पतिवार देर रात हुई अतिवृष्टि के बाद नारायणबगड़ बाजार में भारी मात्रा में पत्थर और मिट्टी का मलबा आ गया। राजकीय इंटर कॉलेज परिसर, कई दुकानों और वाहनों में मलबा घुस गया। राष्ट्रीय राजमार्ग भी मलबे से पट गया, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। सुबह से बीआरओ की टीम मार्ग को खोलने में जुटी रही, जबकि स्थानीय प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर नुकसान का आकलन शुरू कर दिया।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले 8 से 10 वर्षों से हर बारिश में इसी स्थान पर भारी मलबा आता है। यहां स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी लगातार खतरे की जद में रहता है, लेकिन अब तक स्थायी सुरक्षा कार्य नहीं किए गए हैं। लोगों का आरोप है कि प्रशासन और सरकार ने इस संवेदनशील क्षेत्र के लिए कोई ठोस योजना नहीं बनाई है।
चमोली जिला आपदा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है। पिछले वर्ष थराली और चेपड़ों क्षेत्र में आई आपदा में भारी नुकसान हुआ था। कई दुकानों में मलबा घुस गया, दुकानें क्षतिग्रस्त हो गईं और लोगों की आजीविका प्रभावित हुई। चेपड़ों गांव के निवासी गंगादत्त जोशी आपदा में बह गए थे, जिनका आज तक पता नहीं चल पाया है।





