फाटो जोन में दिखा दुर्लभ डस्की ईगल आउल, 15 साल बाद जोड़े में एंट्री!

रामनगर (उत्तराखंड): कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से सटे तराई पश्चिमी क्षेत्र के फाटो पर्यटन जोन से वन्यजीव प्रेमियों के लिए रोमांचक खबर सामने आई है। यहां करीब 15 वर्षों बाद दुर्लभ डस्की ईगल आउल (Dusky Eagle Owl) का जोड़ा दिखाई दिया है। इस दुर्लभ पक्षी को नेचुरलिस्ट हिमांशु तिरूवा ने अपने कैमरे में कैद किया। तस्वीरें […]

रामनगर (उत्तराखंड): कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से सटे तराई पश्चिमी क्षेत्र के फाटो पर्यटन जोन से वन्यजीव प्रेमियों के लिए रोमांचक खबर सामने आई है। यहां करीब 15 वर्षों बाद दुर्लभ डस्की ईगल आउल (Dusky Eagle Owl) का जोड़ा दिखाई दिया है। इस दुर्लभ पक्षी को नेचुरलिस्ट हिमांशु तिरूवा ने अपने कैमरे में कैद किया।

तस्वीरें सामने आते ही पक्षी प्रेमियों और प्रकृति शोधकर्ताओं में उत्साह की लहर दौड़ गई। जानकारी के मुताबिक, डस्की ईगल आउल को आखिरी बार लगभग 15 वर्ष पहले कॉर्बेट क्षेत्र में दर्ज किया गया था। इसके बाद से इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी। ऐसे में इतने लंबे अंतराल के बाद इस प्रजाति का वह भी जोड़े में दिखाई देना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हिमांशु तिरूवा के अनुसार, यह पक्षी स्वभाव से शांत, अत्यंत सतर्क और कम दिखाई देने वाला होता है। घने जंगलों में रहने वाली यह प्रजाति आसानी से नजर नहीं आती, इसलिए इसका दिखना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है।

वन विभाग ने भी इस साइटिंग को अहम माना है। कुमाऊं मुख्य वन संरक्षक डॉ. साकेत बडोला ने बताया कि कॉर्बेट और आसपास के जंगलों में जैवविविधता संरक्षण को लेकर निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। प्राकृतिक आवास की सुरक्षा, मानवीय हस्तक्षेप में कमी और बेहतर संरक्षण रणनीतियों का सकारात्मक परिणाम अब देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र के संतुलित और अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत है।

पक्षी प्रेमी सोमंता घोष का मानना है कि डस्की ईगल आउल की मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि क्षेत्र में शिकार प्रजातियों की उपलब्धता और घने जंगलों की स्थिति बेहतर है। यह साइटिंग पर्यटन के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

करीब डेढ़ दशक बाद इस दुर्लभ पक्षी की वापसी ने कॉर्बेट क्षेत्र को फिर से वन्यजीव प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना दिया है। साथ ही, यह संरक्षण प्रयासों की सफलता का मजबूत संकेत भी माना जा रहा है।

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