कागजों में दौड़ते रहे वाहन, डीजल के नाम पर लाखों का घोटाला

हरबर्टपुर नगर पालिका में ईंधन खरीद के नाम पर बड़े वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त दस्तावेजों में यह खुलासा हुआ है कि पिछले कई वर्षों से डीजल और पेट्रोल की खरीद में गड़बड़ी कर हर महीने लाखों रुपये का भुगतान किया जाता रहा।   नगर पालिका […]

हरबर्टपुर नगर पालिका में ईंधन खरीद के नाम पर बड़े वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त दस्तावेजों में यह खुलासा हुआ है कि पिछले कई वर्षों से डीजल और पेट्रोल की खरीद में गड़बड़ी कर हर महीने लाखों रुपये का भुगतान किया जाता रहा।

 

नगर पालिका सभासद विनोद कश्यप द्वारा आरटीआई के माध्यम से मांगी गई जानकारी में सामने आया कि पालिका परिसर में लंबे समय से खड़ा एक कंडम कूड़ा वाहन भी कागजों में नियमित रूप से चलाया जाता दिखाया गया। इस वाहन के लिए रोजाना डीजल की खपत दर्ज कर भुगतान किया जाता रहा, जबकि वास्तविकता में वाहन उपयोग में नहीं था।

 

जांच में यह भी सामने आया कि वाहनों की डेली लॉगबुक में दूरी के आंकड़ों के साथ छेड़छाड़ की गई। उदाहरण के तौर पर हरबर्टपुर से ढकरानी की वास्तविक दूरी करीब तीन किलोमीटर है, लेकिन लॉगबुक में इसे 41 किलोमीटर दर्ज किया गया। इसी तरह हरबर्टपुर से धर्मावाला की दूरी 81 किलोमीटर और हरबर्टपुर से देहरादून की दूरी 131 किलोमीटर दर्शाकर ईंधन की खपत बढ़ाकर दिखाई गई। इस तरह फर्जी दूरी दर्ज कर डीजल और पेट्रोल के बिल तैयार किए गए और हर महीने बड़ी रकम का भुगतान किया गया।

 

मामले में जमीन खरीद से जुड़ी अनियमितताओं का भी आरोप है। नगर पालिका क्षेत्र के अंतर्गत पीठ बाजार की जमीन के लिए संबंधित भूस्वामी से प्रति बीघा 64 हजार रुपये की दर से भुगतान करने का समझौता हुआ था। लेकिन आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार पालिका ने दो बीघा जमीन के लिए कुल तीन लाख 52 हजार रुपये का भुगतान किया है, जो तय राशि से काफी अधिक बताया जा रहा है।

 

इसके अलावा नगर पालिका द्वारा खरीदे गए कुछ सामानों की कीमतों को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं। जानकारी के मुताबिक डिकंपोजर नामक कीटनाशक दवा की एक लीटर की बोतल 3300 रुपये में खरीदी गई, जबकि बाजार में इसकी कीमत करीब 30 रुपये बताई जा रही है। इसी प्रकार दो प्रकार के दस्ताने क्रमशः 260 रुपये और 245 रुपये प्रति नग की दर से खरीदे गए, जबकि बाजार में इनकी कीमत 35 से 50 रुपये के बीच बताई जाती है।

 

आरटीआई से सामने आए इन तथ्यों के बाद नगर पालिका में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। सभासद विनोद कश्यप ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।

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