सम्मान: डॉ. जितेन ठाकुर को साहित्य भूषण। गजेन्द्र नौटियाल, गुसाईं और चमोला को साहित्य गौरव

देहरादून से साहित्य जगत के लिए बड़ी खबर सामने आई है। उत्तराखंड भाषा संस्थान द्वारा आयोजित उत्तराखंड साहित्य सम्मान 2026 में इस बार कई प्रमुख साहित्यकारों को सम्मानित किया जाएगा।

गजेन्द्र नौटियाल को ‘साहित्य गौरव सम्मान

गढ़वाली भाषा के प्रख्यात साहित्यकार गजेंद्र नौटियाल को उनकी चर्चित पुस्तक “चार रेखड़ा” (गढ़वाली कथा-कथगुळि) के लिए भवानीदत्त थपलियाल पुरस्कार के तहत सम्मानित किया जाएगा।

गजेन्द्र नौटियाल न केवल लेखक, बल्कि नाटककार और रंगकर्मी भी हैं, उन्होंने मंच, रेडियो, नुक्कड़, मुखौटा और कठपुतली—पांचों नाट्य विधाओं में काम किया है। उन्हें उत्तराखंड का पहला ऐसा नाटककार माना जाता है जिसने इन सभी विधाओं में निरंतर सृजन किया।

डॉ. जितेन ठाकुर को ‘साहित्य भूषण’

कथाकार डॉ. जितेन ठाकुर को इस वर्ष उत्तराखंड साहित्य भूषण सम्मान से सम्मानित किया जाएगा।

इस सम्मान के तहत ₹5.51 लाख की धनराशि,सम्मान चिन्ह और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए जाएंगे।

 पत्रकार शीशपाल गुसाईं भी होंगे सम्मानित

वरिष्ठ पत्रकार व इतिहासकार शीशपाल गुसाईं को उनकी पुस्तक “मध्य हिमालय उत्तराखंड की ऐतिहासिक महिलाएं” के लिए साहित्य गौरव सम्मान दिया जाएगा।

यह पुस्तक उत्तराखंड की महिलाओं के ऐतिहासिक योगदान और संघर्ष को दर्शाती है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए भी यह बेहद उपयोगी मानी जा रही है।

 प्रो. दिनेश चमोला को भी सम्मान

प्रख्यात साहित्यकार दिनेश चमोला शैलेश को उत्कृष्ट बाल साहित्य सृजन के लिए उत्तराखंड गौरव सम्मान मंगलेश डबराल पुरस्कार के तहत सम्मानित किया जाएगा।

उन्हें ₹1.51 लाख की धनराशि, सम्मान चिन्ह और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा, उनकी 70 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।

21 अन्य साहित्यकारों को भी मिलेगा सम्मान

भाषा संस्थान की निदेशक मायावती धकरियाल के अनुसार,वर्ष 2022 से विभिन्न भाषाओं में साहित्य गौरव सम्मान दिए जा रहे हैं।2024 से साहित्य भूषण सम्मान की शुरुआत हुई। इस वर्ष 21 अन्य साहित्यकारों को भी सम्मानित किया जाएगा

कब और कहां होगा समारोह?

तारीख: 30 मार्च 2026
स्थान: मुख्य सेवक सदन, मुख्यमंत्री कार्यालय, देहरादून
मुख्य अतिथि: सीएम पुष्कर सिंह धामी

उत्तराखंड साहित्य सम्मान 2026 राज्य की समृद्ध भाषाई और सांस्कृतिक विरासत को सम्मानित करने का एक बड़ा मंच बनकर उभर रहा है।

यह आयोजन न केवल साहित्यकारों को सम्मान देता है, बल्कि नई पीढ़ी को भी अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़ने के लिए प्रेरित करता है।

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