बड़ी खबर: तेज आंधी-तूफान और भारी ओलावृष्टि ने किसानों की नगदी फसलों पर बरपाया कहर,किसानों के सामने आर्थिक संकट

त्यूणी/देहरादून, 6 मई- नीरज उत्तराखंडी  तहसील त्यूणी क्षेत्र में बीते दिनों आए तेज आंधी-तूफान और भारी ओलावृष्टि ने किसानों की नगदी फसलों पर कहर बरपा दिया है। अचानक बदले मौसम ने खेतों में खड़ी फसलों को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया, जिससे किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है। क्षेत्र के कई गांवों से फसलें […]

त्यूणी/देहरादून, 6 मई- नीरज उत्तराखंडी 

तहसील त्यूणी क्षेत्र में बीते दिनों आए तेज आंधी-तूफान और भारी ओलावृष्टि ने किसानों की नगदी फसलों पर कहर बरपा दिया है। अचानक बदले मौसम ने खेतों में खड़ी फसलों को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया, जिससे किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है। क्षेत्र के कई गांवों से फसलें बर्बाद होने की खबरें सामने आई हैं, जिससे ग्रामीणों में चिंता और निराशा का माहौल है।

जानकारी के अनुसार, आंधी-तूफान के साथ हुई ओलावृष्टि इतनी तीव्र थी कि खेतों में तैयार खड़ी सब्जियां, दलहन और अन्य नगदी फसलें पूरी तरह झुक गईं या नष्ट हो गईं। टमाटर, मटर, बीन्स जैसी फसलें सबसे अधिक प्रभावित बताई जा रही हैं। इसके अलावा बागवानी क्षेत्र को भी भारी झटका लगा है—सेब, नाशपाती, आड़ू, प्लम और खुबानी की फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचा है, जिससे बागवानों की चिंता और बढ़ गई है।

स्थानीय किसानों का कहना है कि उन्होंने इस बार बेहतर उत्पादन की उम्मीद में अधिक निवेश किया था, लेकिन प्राकृतिक आपदा ने उनकी सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। किसानों ने बताया कि कई जगहों पर फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

प्रभावित किसानों ने प्रशासन से शीघ्र नुकसान का सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते राहत नहीं मिली, तो उनके सामने आजीविका का संकट गहरा सकता है। किसानों ने सरकार से आपदा राहत कोष से सहायता प्रदान करने और फसल बीमा योजनाओं के तहत भी त्वरित भुगतान सुनिश्चित करने की अपील की है।

वहीं, स्थानीय प्रशासन का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों का आकलन कराने के लिए राजस्व टीमों को निर्देशित किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, जल्द ही नुकसान का सर्वे पूरा कर रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी, ताकि प्रभावित किसानों को नियमानुसार राहत दी जा सके।

इस आपदा ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम की अनिश्चितता और किसानों की बढ़ती मुश्किलों को उजागर कर दिया है। किसान अब प्रशासन की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं कि उन्हें जल्द से जल्द राहत मिल सके।

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