घोटाला : चहेतों के लिए बदले भर्ती नियम। हटाई लिखित परीक्षा

चहेतों की भर्ती के लिए आयुर्वेद विश्विद्यालय ने बिना कार्यपरिषद की स्वीकृति के बदल दिए भर्ती के नियम

उत्तराखंड आयुर्वेद विश्विद्यालय में निजाम कोई भी बदले विवाद थमने का नाम नही ले रहा है। इस विश्विद्यालय का विवादों से नाता चोली- दामन का सा है।अब ताजा नया विवाद विश्विद्यालय द्वारा अपनी ही कार्यसमिति के द्वारा पास किये गए निर्णयों को भर्ती प्रक्रिया में पलट दिए जाने का है। जबकि विश्विद्यालय को इस बदलाव से पहले कार्यसमिति की बैठक में स्वीकृति लेनी थी।अब जबकि वर्ष 2016 के बाद कार्यसमिति की कोई बैठक ही नही हुई तो अंतिम कार्यसमिति द्वारा भर्ती के लिए तय किये मानक ही आजदिन तक लागू होते हैं। लेकिन अजब हाल देखिये कि विश्विद्यालय ने अपने चहेतों को भर्ती में अंदर लाने हेतु इस मानक को ही पलीता लगा दिया क्योंकि विश्विद्यालय को यह भय था कि उनके चहेते लिखित परीक्षा में 50% अंक भी नही ला पाएंगे।

एक आवेदक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पिछली बार हुई एसोसियेट प्रोफेसर की लिखित परीक्षा में मैंने टॉप किया था, जिससे मेरी उम्मीद बंधी थी लेकिन विश्विद्यालय ने चहेतों को अंदर लाने हेतु एकेडमिक के अंक को साक्षात्कार के साथ जोड़ दिया,जबकि विश्विद्यालय की कार्यपरिषद का निर्णय जो आज तक लागू है, के अनुसार एसोसियेट प्रोफेसर सहित प्रोफेसर के पदों पर लिखित परिक्षा आयोजित होनी थी,एवं लिखित परीक्षा में सांमान्य श्रेणी एवं ओबीसी के लिए 55 प्रतिशत अंक तथा अनूसूचित जाति एवं जनजाति के आवेदकों के लिए कम से कम 50 प्रतिशत अंक लाना अनिवार्य था।

अब विश्विद्यालय ने इसके उलट कम फार्म आने का बहाना बना सीधे एसोसियेट प्रोफेसर के पदों को साक्षात्कार के माध्यम से भरने का निर्णय ले इंटरव्यू करा दिए जो इसके अपने ही कार्यपरिषद द्वारा लिए गये निर्णय के विरुद्ध हैं।

विश्विद्यालय के द्वारा की गई इ चालाकी से योग्य आवेदक नाराज हैं और उनका कहना है कि पिछली बार भी चहेतों के द्वारा लिखित परीक्षा क्वालीफाई न कर पाने के कारण उनको अंदर नहीं लाया जा सका और विज्ञप्ति रद्द कर दी गई और इस बार चहेतों को अंदर लाने के लिए नया तरीका बड़ी सफाई से अंजाम दिया गया ,अब इस विश्विद्यालय के नए निजाम से एसिस्टेंट प्रोफेसर एवं चिंकित्साधिकारी के पदों पर आयोजित होने वाली परीक्षा में पारदर्शिता की उम्मीद करना बेमानी है।इस विश्विद्यालय के लिये एक ही कथन सत्य है -“अंधा बांटे रेवड़ी अपने अपनों को दे”

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