देहरादून। उत्तराखंड में अवैध खनन के खिलाफ सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। खनन निदेशालय में मंगलवार को आयोजित राज्यस्तरीय समीक्षा बैठक में पिछले कई वर्षों से लंबित लगभग ₹250 करोड़ की बकाया धनराशि की वसूली के लिए संबंधित मामलों में शीघ्र रिकवरी सर्टिफिकेट (आरसी) जारी करने के निर्देश दिए गए। बैठक की अध्यक्षता खनन निदेशक राजपाल लेघा ने की और इसमें राज्य के सभी जिला खान अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।
बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए खनन विभाग का ₹1500 करोड़ का राजस्व लक्ष्य निर्धारित किया गया। निदेशक ने सभी जिला खान अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि लक्ष्य की शत-प्रतिशत पूर्ति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि केवल राजस्व बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि विभागीय कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध कार्रवाई भी सुनिश्चित करनी होगी।
अवैध खनन, अवैध परिवहन और अवैध भंडारण को लेकर भी बैठक में गंभीर चर्चा हुई। निदेशक ने सभी जिलों में सघन अभियान चलाने, संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रशासन, पुलिस और खनन विभाग के बीच बेहतर समन्वय से ही अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।
बैठक में ई-चेक गेट प्रणाली के माध्यम से जारी किए गए ई-चालानों की वसूली की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि लंबित ई-चालानों की समयबद्ध वसूली सुनिश्चित की जाए और डिजिटल निगरानी प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाया जाए, ताकि राजस्व हानि को रोका जा सके।
सबसे महत्वपूर्ण चर्चा उन मामलों को लेकर हुई जिनमें अवैध खनन, परिवहन और भंडारण से संबंधित लगभग ₹250 करोड़ की धनराशि वर्षों से बकाया पड़ी हुई है। निदेशक राजपाल लेघा ने संबंधित अधिकारियों से कहा कि ऐसे मामलों की तत्काल समीक्षा कर रिकवरी सर्टिफिकेट जारी किए जाएं और प्रभावी वसूली अभियान चलाया जाए। उन्होंने बड़े बकायेदारों के मामलों को प्राथमिकता देने के भी निर्देश दिए।
राजपाल लेघा ने बैठक में कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप राजस्व वृद्धि, अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण और लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए समन्वित और परिणामोन्मुख कार्यवाही की जानी चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि सभी अधिकारी गंभीरता से कार्रवाई करें तो विभाग की कार्यक्षमता और राजस्व संग्रहण में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।
खनन विभाग की इस कार्रवाई को राज्य में अवैध खनन नेटवर्क के खिलाफ एक बड़े अभियान की शुरुआत माना जा रहा है। यदि विभाग ₹250 करोड़ की लंबित वसूली में सफल रहता है, तो इससे न केवल राज्य के राजस्व में बड़ी बढ़ोतरी होगी, बल्कि अवैध खनन गतिविधियों पर भी प्रभावी अंकुश लगने की उम्मीद है।







