पुरोला, 6 अगस्त।नीरज उत्तराखंडी
राजकीय महाविद्यालय पुरोला में उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय की एम.ए. प्रथम सेमेस्टर (ओपन) की एक छात्रा ने परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप लगाते हुए प्राचार्य को शिकायती पत्र सौंपा है। छात्रा ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी अन्य छात्र के साथ ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो।
शिकायतकर्ता छात्रा ने बताया कि वह उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के शैक्षणिक सत्र 2026-27 में एम.ए. प्रथम सेमेस्टर की छात्रा है। उसका आरोप है कि उसने निर्धारित तिथियों पर सभी परीक्षाएं दीं, लेकिन 4 अगस्त को आयोजित अंतिम परीक्षा के दौरान उसे परीक्षा में बैठने से रोक दिया गया। इससे उसका पूरा शैक्षणिक वर्ष प्रभावित होने की आशंका पैदा हो गई है।
छात्रा का कहना है कि उसने जिस पहचान पत्र (आईडी) के आधार पर पूर्व की परीक्षाएं दी थीं, उसे बाद में अमान्य (अवैध) घोषित कर दिया गया। उसका आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में उसकी कोई गलती नहीं थी, लेकिन इसके बावजूद उसे अंतिम परीक्षा से वंचित कर दिया गया, जिससे उसके भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है।
छात्रा ने प्राचार्य से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई करने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की मांग की है। शिकायत की एक प्रति उपजिलाधिकारी पुरोला को भी प्रेषित की गई है।
महाविद्यालय प्रशासन का पक्ष
इस संबंध में महाविद्यालय के परीक्षा समन्वयक के.डी. रतूड़ी ने बताया कि परीक्षा के दौरान छात्रा के पास विश्वविद्यालय द्वारा मान्य कोई वैध पहचान पत्र उपलब्ध नहीं था। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार बिना वैध पहचान पत्र के किसी भी अभ्यर्थी को परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसलिए विश्वविद्यालय के नियमों का पालन करते हुए छात्रा को परीक्षा में शामिल नहीं होने दिया गया।
अब इस मामले में छात्रा की शिकायत और महाविद्यालय प्रशासन के पक्ष के बाद जांच के उपरांत ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।







